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किसानों को पसंद न आई सरकार की पेशकश, कानूनों को रद्द करने से कम कुछ भी मंजूर नहीं

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से विवादास्पद कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक के लिए निलंबित करने की पेशकश किसान संगठनों को पसंद नहीं आई। किसानों को कानूनों को रद्द किए जाने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार के साथ शुक्रवार को 11वें दौर की वार्ता से पहले किसानों ने यह फैसला लेकर अपनी स्थिति साफ कर दी। अब वार्ता में उनका पूरा फोकस तीनों कानूनों को रद्द कराने, न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी संरक्षण देने और 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड करने पर रहेगा।

केंद्र सरकार ने बुधवार को हुई 10वें दौर की वार्ता में तीनों कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने और इस अवधि में मसले का समाधान ढूढ़ने की पेशकश की थी। इस पर किसानों ने आपस में चर्चा करने के बाद 22 जनवरी को प्रस्तावित 11वें दौर की वार्ता में जवाब देने को कहा था। वीरवार को किसानों ने सरकार के प्रस्ताव पर अपने बीच चर्चा की। कई घंटे तक चली चर्चा के दौरान किसान संगठनों में भी एकराय नहीं दिखी। सूत्रों के मुताबिक कुछ किसान संगठनों ने सरकार के प्रस्ताव के साथ जाने तो कुछ ने इसे न मानने की बात कही। बताया गया कि पंजाब के 32 किसान संगठनों की अलग से बैठक में भी एक राय नहीं बन पाई। लेकिन बाद में संयुक्त किसान मोर्चा की आमसभा में बहुमत इस पक्ष में रहा कि सरकार की पेशकश उन्हें मंजूर नहीं।

देर शाम जारी एक बयान में संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि आम सभा में सरकार द्वारा कल रखे गए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया। इसके साथ ही तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर लाभदायक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए एक कानून बनाने की बात, इस आंदोलन की मुख्य मांगों के रूप में दोहराई गई। आमसभा में मोर्चा की ओर से इस आंदोलन में अब तक शहीद हुए 147 किसानों को श्रद्धाजंलि दी गई। बयान में कहा गया है कि शांतिपूर्ण चल रहा यह आंदोलन अब देशव्यापी हो चुका है। कर्नाटक में अनेक स्थानों पर वाहन रैलियों के माध्यम से किसान गणतंत्र दिवस के लिए एकजुट हो रहे है। केरल में कई जगहों पर किसान ट्रेक्टर मार्च निकाल रहे हैं।

बयान में बताया गया कि उत्तराखंड के बिलासपुर व रामपुर समेत अन्य जगहों पर किसान ट्रैक्टर मार्च कर दिल्ली की किसान परेड की तैयारी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में किसान 23 जनवरी को राजभवन का घेराव करेंगे और एक जत्था दिल्ली की तरफ भी रवाना होगा। नवनिर्माण किसान संगठन की किसान दिल्ली चलो यात्रा, जो कि ओडिशा से चली थी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बार-बार परेशान किया जा रहा है। उनके रूट बदलने से लेकर बैठकें न करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। हम प्रशासन के इस बर्ताव का विरोध करते हैं। बयान में बताया गया है कि मजदूर किसान शक्ति संगठन के नेतृत्व में किसान, मजदूर व आम लोग शाहजहांपुर बॉर्डर पहुंच रहे हैं। कठपुतली और गीतों के माध्यम से नव उदारवादी नीतियों का विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

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