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खेल संहिता का उल्लंघन करने वाले महासंघों को नहीं मिल सकती मान्यता: अदालत

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को यह साबित करने का आखिरी मौका दिया है कि जिन 41 राष्ट्रीय खेल महासंघों को मान्यता दी गई है, उन्होंने खेल संहिता का पालन किया है। अदालत ने कहा कि खेल संहिता कानून का पालन नहीं करने वाले महासंघों को मान्यता नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि सरकार अगर उसके निर्देशों पर अमल नहीं करती है तो खेल सचिव को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहना होगा । न्यायमूर्ति विपिन सांघी और नजमी वजीरी की पीठ ने कहा कि हम वादी (केंद्र) को छह नवंबर 2020 के आदेश पर अमल करने का आखिरी मौका दे रहे हैं। ऐसा नहीं करने की दशा में सचिव (खेल), युवा कार्य और खेल मंत्रालय को अगली सुनवाई पर मौजूद रहना होगा। इस मामले में हलफनामा दस दिन के भीतर दाखिल करना होगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को मुकर्रर की है। विशेष पीठ 41 महासंघों को मिली मान्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट सचिन दत्ता और केंद्र सरकार के वकील अनिल सोनी ने जवाब जमा करने के लिये कुछ और समय मांगा है। याचिका दायर करने वाले वकील और खेल कार्यकर्ता राहुल मेहरा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पहले ही काफी समय दिया जा चुका है और पहले हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी अपना पल्ला झाड़ चुके हैं। पीठ ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जो खेल आप खेल रहे हो, उसे बदलना होगा। आप सॉफ्टबॉल खेल रहे हो लेकिन अब हार्डबॉल खेलनी होगी। खेल संहिता का पालन क्यो नहीं हो रहा है। पीठ ने कहा कि केंद्र उन्हें मान्यता नहीं देंगे जो इसका पालन नहीं कर रहे हैं। अगर आप इसे अपने अधीन लेना चाहते हैं तो ऐसा कर सकते हैं।

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