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एफएसएसएआई ने लागू किया नया नियम,अगले साल तक खाद्य तेल में वसा को दो फीसदी सीमित करने का निर्णय

नई दिल्ली। भारत ने तेल और वसा में ट्रांस वसा को सीमित करने के लिए नियमों का अनावरण किया है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इस निर्णय से हर साल हृदय रोग से होने वाली मौतों को रोका जा सकेगा। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानि एफएसएसएआई ने घोषणा की है कि सभी खाद्य रिफाइंड तेलए वनस्पतीए बेकरी शॉर्टनिंगए मार्जरीन में जनवरी 2021 तक केवल 3 प्रतिशत ट्रांस वसा तक हो गया है और जनवरी 2022 तक 2 प्रतिशत हो जाएगा। यह कदम एफएसएसएआई द्वारा 2018 में खाद्य तेलों और सभी खाद्य पदार्थों में ट्रांस वसा को कम करने के लिए की गई अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में पहला कदम है। कोरोनरी हृदय रोग के कारण हर साल 1.5 मिलियन से अधिक मौतें होती हैं और हर साल इनमें से लगभग 5प्रतिशत यानि 71 हजरी मौतों को ट्रांस वसा सेवन के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इस विनियमन की अधिसूचना एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2023 तक ट्रांस वसा के वैश्विक उन्मूलन का आह्वान किया था। डब्ल्यूएचओ की सितंबर 2010 में जारी की गई दूसरी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसारए लगभग 40 देशों ने पहले ही सर्वोत्तम अभ्यास नीतियों को लागू किया है। ट्रांस वसा को खत्म करने के लिए। ये सर्वोत्तम अभ्यास नीतियां औद्योगिक रूप से उत्पादित वसा के स्तर को सभी खाद्य पदार्थों में कुल वसा के 2 प्रतिशत या उससे कम तक सीमित करती हैं। एफएसएसएआई द्वारा घोषित नए नियम डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाए गए स्तर तक सभी वसा और तेलों में ट्रांस वसा के स्तर को नीचे लाएंगे। देश के प्रमुख उपभोक्ता संगठन कंज्यूमर वॉयस के सीओओ असीम सान्याल ने एफएसएसएआई द्वारा पारित नए नियमों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत के एफएसएसएआई ने यह कानून बनाकर ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह मधुमेह के साथ हृदय संबंधी बीमारियां कोविड रोगियों के लिए घातक साबित हो रही हैं। अभी एफएसएसएआई द्वारा एक और अधिनियम लाना है जिससे हमारी भारतीय थाली ट्रांस फैट मुक्त सुनिश्चित होगी। खाद्य तेलों और वसा में ट्रांस.वसा की मात्रा को सीमित करने के लिए प्रतिबद्ध होने के अलावाए एफएसएसएआई ने 2019 में एक मसौदा अधिसूचना भी जारी की थी जिसमें सभी खाद्य पदार्थों में ट्रांस.वसा के स्तर को कम करने की मांग की गई थीए जिसे अभी भी लागू किया जाना है। एक बार अपनाए जाने के बादए यह अतिरिक्त विनियमनए डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसारए सर्वोत्तम ट्रांस.वसा नीतियों वाले देशों की श्रेणी में भारत को स्थान देगा। डॉ राजन शंकरए डायरेक्टर न्यूट्रिशनए टाटा ट्रस्ट्स ने कहाए श्हम इस विनियमन को लागू करने और दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए एक उदाहरण स्थापित करने के लिए एफएसएसएआई की सराहना करते हैंय अब यह महत्वपूर्ण है कि एफएसएसएआई खाद्य पदार्थों में समान विनियमन लागू करे और 2022 तक ट्रांस फैट्स मुक्त भारत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए खाद्य तेल और खाद्य उद्योगों में प्रवर्तन पर ध्यान केंद्रित करे।

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