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नए साल पर सस्ते घर का तोहफा,पहले पैसे देने पर भी नहीं मिलता था मकान: मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए साल के पहले ही दिन शहरी भारत की रूप रेखा बदलने की दिशा में अहम घोषणा की। ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज इंडिया (जीएचटीसी इंडिया) के तहत छह राज्यों त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में लाइट हाउस (एलएचपी) परियोजनाओं की आधारशिला रखी। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित एक समारोह में प्रधानमंत्री ने आवास योजना (शहरी) को लागू करने में उत्कृष्टता के लिए वार्षिक पुरस्कार भी प्रदान किए। केंद्रीय शहरी मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत लोगों को स्थानीय जलवायु और इकोलॉजी का ध्यान रखते हुए टिकाऊ आवास प्रदान किए जाते हैं। इस योजना के तहत हल्के मकानों का निर्माण इंदौर, राजकोट, चेन्नई, रांची, अगरतला और लखनऊ में किया जा रहा है। हर जगह इस तरह के एक हजार आवासों का निर्माण किया जाना है। यह निर्माण कार्य एक साल के भीतर पूरा कर लिए जाने की संभावना है। इस अवसर पर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अलावा त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक टेक्नोलॉजी और इनोवेटिव आइडिया पर काम किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 54 नवोन्मेषी आवासीय निर्माण प्रौद्योगिकी के एक संग्रह का विमोचन भी किया।

कितनी कीमत में मिलेगा घर?-हरित निर्माण तकनीक का उपयोग कर शहरी गरीबों को छत मुहैया करने संबंधी एलएचपी परियोजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए मकान बनाए जाएंगे। इसके तहत ईडब्ल्यूएस को मात्र पौने पांच लाख रुपये में 415 वर्ग फीट के फ्लैट मिलेंगे। मकानों की कीमत 12.59 लाख रुपये है, जिसमें केंद्र व राज्य सरकार की ओर से 7.83 लाख रुपये अनुदान के तौर पर दिए जाएंगे। यानी बाकी के 4.76 लाख रुपये लाभार्थियों को देने होंगे। फ्लैटों का आवंटन प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अनुसार होगा। लाइट हाउस प्रॉजेक्ट की खासियत यह है कि यह 14 मंजिला टावर होगा और इसके तहत 1,040 फ्लैट बनाए जाएंगे। प्रत्येक फ्लैट 415 वर्ग फुट का होगा। कारपेट एरिया 34.50 वर्ग मीटर का होगा।

रोजाना बनेंगे ढाई से तीन घर: पीएम मोदी-प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज नई ऊर्जा के साथ, नए संकल्पों के साथ और नए संकल्पों को सिद्ध करने के लिए तेज गति से आगे बढ़ने की शुरूआत है। उन्होंने कहा कि ये 6 प्रोजेक्ट वाकई लाइट हाउस यानी प्रकाश स्तंभ की तरह हैं। ये 6 प्रोजेक्ट देश में हाउसिंग कंस्ट्रक्शन को नई दिशा दिखाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत देश के 6 शहरों में 365 दिनों में 1 हजार मकान बनेंगे। पीएम ने कहा कि इसका मतलब ये है कि रोजाना ढाई से तीन मकान बनेंगे। उन्होंने इंजीनियर, विद्यार्थियों और प्रोफेसरों से अपील की कि वे इन साइटों पर जाएं और इन प्रोजेक्ट का अध्ययन करें। पीएम ने इन सभी प्रोजेक्ट के लिए विदेशी तकनीक का सहारा लिया गया है, आप इसका अध्ययन करें और ये देखें कि क्या ये भारत के लिए सही है या फिर इसमें कुछ सुधार की गुंजाइश है। प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक टेक्नोलॉजी और इनोवेटिव आइडिया पर काम किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस आवास योजना के लिए चयनित सभी शहरों में अमेरिका, फिनलैंड, स्विट्जरलैंड और कनाडा समेत अलग-अलग देशों की तकनीक का इस्तेमाल कर घर बनाने के बारे में जानकारी दी। एलएचपी के तहत केंद्र सरकार छह शहरों- इंदौर, चेन्नई, रांची, अगरतला, लखनऊ और राजकोट में 1,000-1000 से अधिक मकानों का निर्माण करेगी।

कोरोना के समय श्रमिकों की अहमियत पता चली: मोदी-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि दूसरे राज्यों में काम करने वाले श्रमिक कोरोना संक्रमण काल में जब अपने-अपने गांवों की ओर लौट गए तो तब उन राज्यों को उनकी अहमियत का पता चला जो पहले कभी उन्हें अपमानित किया करते थे। प्रधानमंत्री ने अपनी इस टिप्पणी के दौरान किसी राज्य विशेष का नाम नहीं लिया। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा देशभर में लागू किए लॉकडाउन के दौरान दिल्ली और मुंबई सहित कई प्रमुख शहरों में औद्योगिक गतिविधियां ठप्प हो गई थीं और इस कारण प्रवासी श्रमिकों ने अपने गांवों की ओर पलायन शुरू कर दिया था। प्रवासी श्रमिकों और शहरी गरीबों को कम बजट पर आवास की सुविधा मुहैया कराने वाली अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्सेज योजना को कोरोना संकट काल के दौरान उठाया गया बड़ा कदम बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका लक्ष्य एक राज्य से दूसरे राज्य में या फिर गांव से शहरों का रुख करने वाले श्रमिकों के लिए आवासीय सुविधा मुहैया कराना है।

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