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किसान आंदोलन के मामले को बातचीत से हल करे सरकार: आनंद शर्मा

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने सोमवार को कहा कि सुधारों से जुड़े कदम राष्ट्रीय स्तर पर सहमति बनाकर उठाये जाने चाहिए तथा मौजूदा समय में चल रहे किसानों के आंदोलन के मामले में सरकार को बातचीत के जरिए हल निकालना चाहिए। उद्योग चैंबर ‘फिक्की’ की वार्षिक आम बैठक को संबोधित करने दौरान शर्मा ने सरकार से यह आग्रह भी किया कि वह कोरोना महामारी के कारण के कारण प्रभावित हुए तबकों को आर्थिक मदद देने में सरकार अधिक उदार रुख दिखाए तथा अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहन पैकेज की व्यवस्था करे। कांग्रेस नेता के अनुसार, देश को जीडीपी के 10 फीसदी का नुकसान हुआ है और 2019-20 की स्थिति तक आने में उसे एक साल का समय और लगेगा। उन्होंने कहा कि हम आज देख रहे हैं कि कृषि कानूनों को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। सुधार भागीदारी के आधार पर होने चाहिए, एकतरफा नहीं होने चाहिए। इस संदर्भ में विचार-विमर्श होना चाहिए। कुछ भी जल्दबाजी में औेर सहमति के बिना नहीं होना चाहिए। ऐसा करने का नतीजा हम देख रहे हैं। आंदोलन हो रहे हैं, टकराव है और विश्वास का अभाव है। शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि संवाद और चर्चा के माध्यम से हर चीज का समाधान हो सकता है। इस प्रक्रिया में मुख्यमंत्रियों को भी शामिल किया जाना चाहिए और एक राष्ट्र के तौर पर एक होकर संकट को खत्म करना चाहिए।  राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता ने अमेरिका की मिसाल देते हुए कहा कि वहां के सर्वोच्च न्यायालय ने जिम्मेदारी संभाली और चुनाव से जुड़ी कटुता खत्म हो गई। उन्होंने कहा कि भारत में न्यायपालिका स्वतंत्र है और उच्चतम न्यायालय का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संविधान को बरकरार रखे।

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