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राजस्थान में तीन शर्तों के साथ राज्यपाल ने दी विधानसभा सत्र बुलाने की अनुमति

जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने सोमवार को तीन शर्तें लगाते हुए विधानसभा सत्र बुलाने संबंधी राज्य मंत्रिपरिषद के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा सत्र नहीं बुलाने जैसी उनकी कोई भी मंशा नहीं है, लेकिन सत्र संवैधानिक प्रावधानों के अनुकूल आहूत होना चाहिए।

राजभवन सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने की राज्य सरकार की संशोधित पत्रावली पर तीन शर्तें लगाते हुए कार्यवाही के लिए संसदीय कार्य विभाग को भेज दी है। हालांकि इन शर्तों को लेकर कहा जा रहा है कि राज्यपाल ने सत्र बुलाने की मंजूरी देकर भी मंजूरी नहीं दी है। सरकार पर शर्तें थोप दी है, जिसके चलते एक जवाबदेही बन  गई है कि पहले राजभवन को उन तीनों बिंदुओं पर सरकार संतुष्ट करे। इसके पहले शुक्रवार को राज्यपाल ने सरकार के प्रस्ताव को कुछ बिंदुओं पर कार्यवाही के निर्देश के साथ लौटाया था। राजभवन की ओर से जारी एक बयान के अनुसार राज्यपाल कलराज मिश्र ने संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत तीन शर्तें रखी हैं, जिसमें कहा कि विधानसभा सत्र 21 दिन का स्पष्ट नोटिस देकर बुलाया जाए, जिससे संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों की मूल भावना के अंतर्गत सभी को समान अवसर सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में राज्य सरकार के बयान से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है, यदि ऐसा है तो विश्वास मत की सारी प्रक्रिया प्रमुख सचिव संसदीय कार्य की मौजूदगी में हो और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। इसके अलावा कोरोना महामारी को देखते हुए सत्र के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए 200 विधायकों और 1000 अधिकारियों-कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की जाए। राज्यपाल ने यह भी साफ किया कि विश्वास मत हासिल करने का सत्र बुलाने संबंधी प्रस्ताव में उल्लेख नहीं है। यदि राज्य सरकार विश्वास मत हासिल करना चाहती है तो यह अल्पावधि में सत्र बुलाए जाने का युक्तिसंगत आधार बन सकता है।

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