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हेराल्ड हाउस: सुप्रीम कोर्ट ने दी कांग्रेस नेताओं को राहत

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को यहां हेराल्ड हाउस खाली करने को कहा गया था।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने एजेएल की याचिका पर केंद्र के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एलएंडडीओ) को नोटिस जारी किया। एजेएल ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी के आईटीओ इलाके में हेराल्ड हाउस परिसर को खाली कराने के लिये कोई भी दबावकारी कदम उठाने से केंद्र को रोकने की मांग करने वाली उसकी याचिका को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि एसोसिएटिड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के शेयर यंग इंडियन (वाईआई) कंपनी को हस्तांतरित करने का पूरा लेनदेन यंग इंडियन (वाईआई) को ‘परिसर में लुभावने हितों का गुप्त एवं अवैध हस्तांतरण’ था। एजेएल ने शीर्ष अदालत से केंद्र के 30 अक्टूबर, 2018 के उस आदेश को भी रद्द करने की मांग की है जिसमें उसके 56 साल पुराने पट्टे को समाप्त कर दिया गया था और उससे इस आधार पर परिसर को खाली करने के लिए कहा गया था कि वहां कोई मुद्रण या प्रकाशन गतिविधि नहीं चल रही थी और भवन का सिर्फ व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। उच्च न्यायालय ने 28 फरवरी को एजेएल की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि लीज शर्तों का ‘दुरुपयोग’ हुआ है। एजेएल की याचिका में कहा गया है कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल की नेहरूवादी आदर्शों के लिए घृणा छिपी नहीं है। केंद्र और एल एंड डीओ ने अपने आदेश में कहा था कि कम से कम पिछले 10 वर्षों से परिसर में कोई प्रेस काम नहीं कर रही है और इसका (परिसर का) इस्तेमाल पट्टे की शर्तों का उल्लंघन करके वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। एजेएल ने उच्च न्यायालय और शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिकाओं में इन आरोपों से इनकार किया।

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