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भारत-चीन विवाद सुलझाने को तीन चरणों में सीमा से सैनिक हटाएंगे

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयास जारी हैं। दोनों देशों की सेना पूर्वी लद्दाख में तीन चरणों वाले (थ्री-स्टेप) डिसइंगेजमेंट (सैनिकों को पीछे हटाना) और पहले जैसी स्थिति बहाल करने को लेकर विचार कर रही हैं। आगे वाले स्थान (फॉरवर्ड एरिया) से सैनिकों को पीछे हटाने यानी डिसइंगेजमेंट के तहत दोनों देशों के जवान अप्रैल वाली अपनी पुरानी यथास्थिति पर लौट जाएंगे। हालांकि अभी डेपसांग क्षेत्र में व्याप्त तनाव को लेकर किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “दोनों देश सैनिकों के निर्वासन सहित तीन-चरण के डिसइंगेजमेंट प्रस्ताव पर काम करने के लिए सहमत हुए हैं, लेकिन अभी तक जमीन पर कुछ भी नहीं हुआ है। गतिरोध खत्म करने के लिए छह नवंबर को चुशुल में कॉर्प्स-कमांडर लेवल की आठवें चरण की बातचीत की गई थी।इस सप्ताह नौवें दौर की वार्ता होने की संभावना है, लेकिन अभी तारीख तय नहीं हुई है। पहले चरण के तहत पूर्वी लद्दाख में सीमा पर आगे के स्थानों से टैंकों हो हटाया जाएगा, जो कि इस दिशा में पहला कदम होगा। दूसरे चरण में, भारतीय सेना पैंगॉन्ग झील के किनारे फिंगर-3 पर स्थित धन सिंह थापा पोस्ट पर वापस लौट आएगी, जबकि चीनी सैनिक फिंगर-8 पर वापस लौटेंगे। तीसरे चरण में, भारतीय सेना उन सभी 13 महत्वपूर्ण ऊंचाइयों और क्षेत्रों से हट जाएगी, जिसमें रेजांग ला भी शामिल है, जहां उसने पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे के साथ लगने वाले क्षेत्रों पर अपनी पहुंच स्थापित कर ली थी। सीमा के पास ऊंचाई वाले स्थानों पर कब्जा करने वाले इस कदम ने भारत को चीन पर बढ़त हासिल करने में मदद की है।

दरअसल 30 अगस्त को भारत ने रेचन ला, रेजांग ला, मुकर्पी, और टेबलटॉप जैसे दक्षिणी तट पर पैंगोंग झील के पास महत्वपूर्ण पहाड़ी ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया था, जो तब तक मानव रहित थी। भारत ने ब्लैकटॉप के पास भी कुछ तैनाती की है। चीन द्वारा भड़काऊ सैन्य कदम उठाने की कोशिश के बाद यह कार्रवाई की गई थी। दोनों देशों के सैनिक माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान के संपर्क में रहते हैं, इसलिए दोनों देश अब सैनिकों को वापस लेने पर सहमत हुए हैं।

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