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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री जॉनसन के स्वागत के लिए भारत तैयार: विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में विभिन्न मामलों पर जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने चीन के बंदरगाह पर भारतीय नागरिकों के साथ फंसे जहाजों, गणतंत्र दिवस पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा, नेपाल के राजनीतिक हालात समेत कई मामलों पर सूचनाएं दीं। श्रीवास्तव ने कहा कि चीन के जिंगतांग बंदरगाह पर दो जहाज अभी भी फंसे हुए हैं, जिन पर भारतीय नागरिक भी सवाल हैं। ये दोनों जहाज कारगो डिस्चार्ज की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। हमारी सरकार चीनी सरकार के संपर्क में है। इन जहाजों से पहले आए कुछ जहाजों को कारगो डिस्चार्ज की अनुमति मिल गई है। गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर आने वाले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कार्यक्रम को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। दरअसल, ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन सामने आने के बाद जॉनसन की भारत यात्रा पर संदेह जताया जा रहा था। नेपाल की बात करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि हमें नेपाल में हालिया राजनीतिक घटनाओं की जानकारी है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को देखते हुए ये नेपाल के आंतरिक मामले हैं। एक पड़ोसी के तौर पर भारत नेपाल का और शांति, समृद्धि और विकास की ओर बढ़ रहे नेपाल के नागरिकों का सहयोग करता रहेगा। अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि चाबहार परियोजना को लेकर उजबेकिस्तान, ईरान और भारत के बीच होने वाली अगली बैठक की मेजबानी भारत करेगा। उन्होंने कहा कि हालांकि, अभी इस बैठक की तारीख तय नहीं हुई है। एक प्रमुख भागीदार के तौर पर अफगानिस्तान को भी इस बैठक के लिए आमंत्रित किया जाएगा। भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर श्रीवास्तव ने कहा कि दोनों देश राजनयिक और सैन्य माध्यमों से संपर्क बनाए हुए हैं। इन चर्चाओं के माध्यम से से दोनों देशों को एक-दूसरे की स्थिति को समझने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि भारत-चीन सीमा मामलों पर डब्ल्यूएमसीसी की बैठक 18 दिसंबर को आयोजित हुई थी।

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