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भारतीय सेना को मिला इजरायली टैंक कलिर, पलक झपकते ही दुश्मन का काल बनेगी स्पाइक

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नई दिल्ली
भारतीय थल सेना ने इजरायल निर्मित टैंक रोधी स्पाइक मिसाइलों का मध्य प्रदेश के महू में सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस मिसाइल के जरिए दुश्मन के टैंकों और बंकर को पलक झपकते ही नष्ट किया जा सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि ‘स्पाइक’ चैाथी पीढ़ी की मिसाइल है जो 4 किमी की दूरी तक किसी भी लक्ष्य को भेद सकती है। इससे आतंकी ठिकानों को भी ध्वस्त किया जा सकता है। इजरायली एटीजीएम को कंधे पर रखकर दागा जाता है और इसे ले जाना बेहद आसान है। थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत और कई कमांडर बुधवार को हाल ही में नयी खरीदी गई इन मिसाइलों के परीक्षण के गवाह बने। स्पाइक मिसाइल के मिलने के बाद अब सेना को लड़ाकू क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है। श्स्पाइकश् को जम्मू-कश्मीर में उत्तरी कमान के युद्ध क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर तैनात किया गया है। इससे पाकिस्तान के साथ लगी देश की सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक स्पाइक का इस्तेमाल नियंत्रण रेखा के करीब बंकरों, शेल्टरों, घुसपैठ के अड्डों और आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट करने के लिए किया जा सकता है। स्पाइक एटीजीएमएस मिसाइल श्दागो और भूल जाओश् के सिद्धांत पर काम करती है। यह मिसाइल पूरी तरह से पोर्टेबल है और इतनी ज्यादा शक्तिशाली है कि 4 किमी के दायरे में किसी भी टैंक को नष्ट कर सकती है और दुश्मन के बंकर को तबाह कर सकती है। सेना के सूत्रों ने बताया कि इन टैंक रोधी गाइडेड मिसाइलों और इसके लांचर को उत्तरी युद्ध क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के साथ 16-17 अक्टूबर से शामिल किया गया है। इस समय इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

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