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चीन की घेराबंदी के लिए भारत ने दक्षिण चीन सागर में वॉरशिप तैनात किया

नई दिल्ली। लद्दाख सीमा पर गलवान घाटी में 15 जून को चीन के सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन चीन अपने रुख पर अड़ा हुआ है। वह अप्रैल से पहले वाली स्थिति बहाल करने को तैयार नहीं है। फिंगर-4 पर उसके सैनिक अभी भी अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। चीन के इस रुख को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए दक्षिण चीन सागर में वॉरशिप तैनात करना शुरू कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों दोनों पक्षों के बीच हुई डिप्लोमैटिक स्तर की बातचीत में चीन ने सबसे पहले भारत के इस कदम को लेकर नाराजगी जताई थी। दक्षिण चीन सागर पर चीन बीते कुछ सालों से अपना आधिपत्य बताता रहा है और जगह जगह आर्टिफिसियल द्वीप बना कर अपना कब्जा बना लिया है। इस क्षेत्र में 2009 से लगातार अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। जबकि भारत की सैन्य मौजूदगी को लेकर विरोध भी जताता रहता है।

भारतीय नौसेना के वॉरशिप के दक्षिण चीन सागर में उतरने के बाद चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने विरोध दर्ज कराया है। लेकिन अब भारत अपने रुख पर कायम है। यह भारत की रणनीति है चीन पर दबाव बढ़ाने की। सीमा पर चीन अगर अपनी सेना को पीछे नहीं करता तो भारत दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने पर विचार कर रहा है। वहीं दक्षिण चीन सागर में पहले से मौजूद अमेरिकी नौसेना से भारतीय नौसेना ने संपर्क स्थापित किया है।

हिंद महासागर क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाई

सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी है। जलडमरू मध्य इलाके में भी भारतीय नौसेना ने अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। इसके साथ ही आसपास होने वाली किसी भी तरह की गैर जरूरी गतिविधि से निपटने के लिए हर तैयारी शुरू कर दी है। हिंद महासागर क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाने के लिए सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है।

 

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