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तीन दिवसीय यात्रा पर वाल्विस खाड़ी पहुंचा ‘भारतीय नौसेना का तरकश’

नई दिल्ली: अफ्रीका, यूरोप और रूस में भारतीय नौसेना की विदेशी तैनाती की निरंतरता में, भारतीय नौसेना का जहाज तर्कश कल यानी 15 सितंबर को तीन दिन की यात्रा के लिए नामीबिया की वाल्विस खाड़ी में पहुंचा। वाल्विस खाड़ी में आईएनएस तर्कश की उपस्थिति भारत के नामीबिया के साथ गर्मजोशी भरे  संबंधों का परिचायक है और परिचालन पहुंच, समुद्री सुरक्षा और मैत्रीपूर्ण राष्ट्रों के साथ इसकी एकजुटता को बढ़ाने के लिए इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जहाज तर्कश की कमान कैप्टन सतीश वासुदेव के पास है और यह तीनों सेनाओं से संबंधित खतरों को दूर करने में सक्षम हथियारों और सेंसर की बहुमुखी रेंज से लैस भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत है। यह जहाज भारतीय नौसेना के पश्चिमी बेड़े का हिस्सा है और यह मुंबई में स्थित फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग –इन-चीफ, पश्चिमी नौ सेना कमान के ऑपरेशनल कमांड के अधीन है।

यात्रा के दौरान, जहाज का कमान अधिकारी नामीबियाई नौसेना के प्रमुख सहित नामीबिया के गणमान्य लोगों और वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों सहित शिष्टाचार भेंट करेगा। दोनों बलों के बीच सहयोग को और बढ़ाने की दिशा में नामीबियाई नौसेना के साथ परस्पर वार्ता की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, सामाजिक संबंधो, जहाजों की विनिमय यात्रा, खेल कार्यक्रम और सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों को भी साझा किया जाता है।

भारत और नामीबिया के बीच लोकतंत्र, विकास और धर्मनिरपेक्षता के साझा मूल्य तथा गर्मजोशी भरे और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंध हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग और सैन्य विनिमय के लिए कई द्विपक्षीय व्यवस्थाएं मौजूद हैं। अपने रक्षा सहयोग के हिस्से के रूप में, भारत ने पिछले कई वर्षों में विभिन्न सैन्य संस्थानों में बड़ी संख्या में नामीबियाई सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया है।

भारतीय नौसेना के जहाजों को नियमित रूप से भारतीय नौसेना के ‘मैत्री सेतु’ के निर्माण के मिशन के रूप में तैनात किया जाता है और यह मैत्रीपूर्ण देशों के साथ-साथ दुनिया भर में समुद्री खतरों को दूर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय देशों के साथ सहयोग को मजबूत करता है। वर्तमान यात्रा का उद्देश्य भारत और नामीबिया के बीच दोस्ती के मौजूदा संबंधों को मजबूत करने के लिए विशेष रूप से, भारत की शांतिपूर्ण उपस्थिति बढ़ाना और मित्र देशों के साथ एकजुटता को बढ़ावा देना है।

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