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रेलवे की ट्रैक पर अब दौड़ेंगी प्राइवेट ट्रेनें, अप्रैल 2023 से शुरू होगा संचालन

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। अप्रैल 2023 तक देश के रेल ट्रैक पर 150 से ज्यादा निजी ट्रेनें चलनी शुरू हो जाएंगी। हालांकि सरकार के इस फैसले को लेकर सियासत भी गरमा गई है। सरकार पर रेलवे के निजीकरण करने का आरोप लगाते हुए अब विरोध शुरू हो गया है।

रेलवे ने अपने 109 मार्गों पर 150 से ज्यादा आधुनिक निजी ट्रेनों के संचालन की सहमति दे दी है। हालांकि रेलवे ने बजट में ही इसकी घोषणा कर दी थी और आईआरसीटीसी को शताब्दी जैसी कुछ ट्रेनों का निजी तौर पर संचालन का जिम्मा भी दे दिया है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए रेलवे ने डेढ़ सौ और ट्रेनों के संचालन का फैसला लिया है, जिसमें यात्री को आधुनिक कोचों में सुखद यात्रा सुनिश्चित कराई जाएगी। एक अनुमान के मुताबिक करीब 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश का अनुमान है। कमाई का एक बड़ा हिस्सा रेलवे को मिलेगा। प्राइवेट ट्रेनों के संचालन के फैसले के सार्वजनिक होते ही सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस ने सरकार पर कोरोना संकट के समय रेलवे का निजीकरण करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि आखिर इस विषय पर संसद में चर्चा कराने या मंजूरी लेने का इंतजार क्यों नहीं किया गया।

पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह दावा भी किया कि अब दूसरे रेलमार्गों को भी निजी हाथों में सौंपा जाएगा। उन्होंने विडियो लिंक के जरि कहा कि रेलवे लगभग ढाई करोड़ लोगों को प्रतिदिन यात्रा करवाता है। यानि आस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर लोग रेलवे के जरिए यात्रा करते हैं। रेलवे रोजगार देने के मामले में भी सातवें नंबर पर आता है। भारतीय रेल का नेटवर्क दूनिया में दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। सिंघवी ने सवाल किया कि हमें आश्चर्य होता है कि किस प्रकार की जिद चल रही है। कोरोना वायरस संकट के समय क्या यह काम करना जरूर है। क्या रेलवे का निजीकरण करने से इस वक्त देश को फायदा होगा। क्या इस वक्त निविदा में जो राशि मांगी गई है, उसमें न्यूनतम भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस बारे में संसद में विचार कर लेते। हम तो कहते हैं कि कानून पारित करवा लेते, लेकिन कम से कम चर्चा करवा लेते। सरकार पतली गली से क्यों निकल रहे हैं। सरकार इतनी जल्दी में क्यों है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि कोरोना संकट के बीच इस कदम का मकसद क्या आगे कर्मचारियों की छंटनी करना है। निजी इकाई उस मार्ग पर कैसे मुनाफा कमाएगी, जब रेलवे को नुकसान हो रहा है। देश इस बारे में जवबादेही मांगता है। चुप्पी से काम नहीं चलेगा।

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