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लोकतंत्र बचाओ रैली के जरिए पुलिसिया ज्यादती पर चौधरियों को एक मंच पर ले आए जयंत

मुजफ्फरनगर। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की सियासी विरासत को लेकर चल रहे उनके पौत्र और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी लोकतंत्र बचाओ रैली के बहाने जाट खापों को एकमंच पर ले आए। बृहस्पतिवार को मुजफ्फरनगर राजकीय इंटर कॉलेज मैदान पर हुई महारैली में बिरादरी और दलीय बंधन भी टूटते दिखे। मंच पर जो नजारा दिखा, जयंत को भविष्य में इसका सियासी फायदा मिलना लगभग तय है।

हाथरस की दलित युवती से कथित गैंगरेप और मौत के बाद पीड़ित परिवार से मिलने जाते वक्त जयंत चौधरी बीते दिनों पुलिसिया ज्यादती के शिकार हुए थे। पुलिस ने उन और उनके समर्थकों पर लाठीचार्ज कर दिया था। कार्यकर्ताओं ने किसी तरह जयंत को घेर कर बचाया था। इस दौरान कई लाठियां उन पर पड़ चुकी थी। इसके बाद ही जयंत ने 8 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर में मिलने की चेतावनी दी थी। उन्होंने लोकतंत्र बचाओ रैली का आह्वान किया और खाप चौधरियों समेत विभिन्न दलों के नेताओं को आमंत्रित किया।

रैली में जयंत के पहुंचने से पहले ही राजकीय इंटर कॉलेज मैदान पर हजारों की भीड़ जमा हो चुकी थी। दोपहर करीब डेढ़ बजे जयंत युवा साथियों के साथ मंच पर पहुंचे तो वहां तमाम खापों के चौधरी मौजूद थे। इनमें बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत, देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह लटियाल, चौधरी रामपाल सिंह, बत्तीसा खाप के चौधरी सूरजमल के साथ ही थाम बेदार श्याम सिंह रविंद्र मलिक आदि मंच पर पहुंचे। इनके अलावा दलीय बंधन तोड़ते हुए हरियाणा से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा, यूपी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज मलिक, सहारनपुर के कांग्रेस नेता इमरान मसूद के अलावा सपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव, आईएनएलडी के महासचिव और हरियाणा के विधायक अभय चौटाला, जय प्रकाश सिंह समेत कई नेता भी इस महारैली में शामिल हुए।

वक्ताओं ने मंच से जयंत के साथ हुई पुलिसिया ज्यादती की निंदा करते हुए प्रदेश और केंद्र की भाजपा नीत सरकार को तानाशाह करार दिया। सरकार पर विपक्ष के नेताओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि भाजपा नीत सरकार किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर देना चाहती है। खेत और खलिहान पूंजीपतियों के हाथों गिरवी रख देना चाहती है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर लाठी चार्ज किया गया, उनका क्या दोष था। जयंत चौधरी पर लाठियां चलाई गईं, उनका क्या दोष था। यही न कि वे एक गरीब, पीड़ित, शोषित वर्ग की पीड़ा सुनने जा रहे थे और उसके लिए न्याय की गुहार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह लाठी दरअसल, किसी नेता पर नहीं, बल्कि किसान, दलितों, मजदूरों की आवाज उठाने वालों पर चलाई गई है। यह सरकार हर उस आवाज को दबा देना चाहती है, जो किसानों की बात करते हैं, मजदूरों की आवाज बनते हैं। पीड़ितों-शोषितों की आवाज बनते हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी किसान एकजुट नहीं हुए तो सरकार किसानों को सड़क पर और उनकी फसल को मंडियों में पीट डालेगी। उन्होंने कहा कि यह सरकार किसानों को खत्म कर देना चाहती है। सहारनपुर के कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर किए गए लाठी चार्ज की निंदा करते हुए कहा कि यह बहुत ही शर्मनाक है। कृषि कानूनों को लेकर उन्होंने कहा कि देश के किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है।

अभय चौटाला ने कहा कि देश में किसानों की आवाज दबाने का काम किया जा रहा है। वहीं जयंत चौधरी ने कहा कि जिस तरह से हाथरस में योगी सरकार ने लाठीचार्ज किया, वह एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार किसानों की राजनीति खत्म कर देना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान जागरूक हैं और अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते लोकतंत्र बचाओ रैली का आयोजन मथुरा में किया जाएगा। यह सिलसिला अब चलता रहेगा। कृषि कानूनों की वास्तविकता किसानों को बताई जाएगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

दरअसल, जयंत इस रैली-आंदोलन के जरिए फिर से अपने वोट को एकजुट करने की मुहिम में लगते दिख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में चुनाव को अभी दो साल है। इसके पहले जयंत अपनी सियासी जमीन बनाने की जुगत में लगते दिख रहे हैं। यह इत्तेफाक ही कहें कि उनके साथ पुलिसिया ज्यादती हुई। जयंत अब इसे मुद्दा बना कर जाट समुदाय की भावनाओं को उभारने और उनकी हमदर्दी हासिल करने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

मालूम हो कि 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे में पीड़ित जाट परिवारों के साथ चौधरी अजीत और जयंत के खुलकर खड़े नहीं होने से इलाके के जाट काफी नाराज हुए थे, जिसका 2014 और फिर 2019 के लोकसभा और फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में रालोद को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। जाटों का एक बड़ा तबका भाजपा के साथ चले जाने से जयंत और चौधरी अजीत दोनों पिछला चुनाव हार गए थे।

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