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लोकसभा चुनाव: अंतिम चरण में दांव पर भाजपा की साख!

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में अंतिम दौर का आठ राज्यों की 59 सीटों पर 19 मई को मतदान होगा, जिसमें 918 उम्मीदवारों के लिए 10 करोड़ 1 लाख 75 हजार से ज्यादा मतदाता वोट करेंगे। खासबात यह है कि इस दौर में खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उसके आठ केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। हालांकि इनके अलावा यूपीए शासनकाल में लोकसभा अध्यक्ष रही मीराकुमार व उपाध्यक्ष चरणजीत सिंह अटवाल के अलावा सात पूर्व केंद्रीय मंत्रियों समेत कई दर्जन सियासी दिग्गजों की साख का भी इस चरण में फैसला होगा।

सत्रहवीं लोकसभा के लिए 543 में से 483 सीटों पर चुनाव हो चुका है, अब अंतिम चरण में 59 सीटों पर मतदान होगा, जिसमें यूपी की वाराणसी सीट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गठबंधन में सपा प्रत्याशी शालिनी यादव और कांग्रेस के अजय राय से मुकाबला होना है। इसके अलावा गाजीपुर में केंद्रीय मंत्री मनोज सिंन्हा और मिर्जापुर सीट पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल(अपना दल) के अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, रमापति राम त्रिपाठी, अभिनेता रवि किशन, आरपीएन सिंह समेत कई नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस चरण में महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर व राबर्ट्सगंज में मतदान होना है। पूर्वांचल में सातवें चरण की 13 सीटों पर होने वाले चुनाव में सपा 8 और बसपा 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा 11 और उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) मिर्जापुर व राबर्ट्सगंज सीटों पर चुनाव मैदान में है। कांग्रेस 11 और उसकी सहयोगी जन अधिकार पार्टी एक सीट पर लड़ रही है। इसके अलावा बिहार की आठ में से सात सीटों को बचाने के लिए भाजपा राजग के दिग्गजों जिनमें चार सीटों पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, आरके सिंह, अश्विनी चौबे व रामकृपाल यादव, लालू यादव की बेटी मीसा भारती, भाजपा के बागी कांग्रेस प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की भी प्रतिष्ठा दांव पर होगी। पंजाब में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, हरसिमरत कौर बादल और उनके पति जो राज्य में उप मुख्यमंत्री रहे सुखबीर सिंह बादल के अलजावा कांग्रेस की पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह की धर्मपत्नी परणीत कौर, गुरदासपुर से अभिनेता सन्नी दयोल, चरणजीत सिंह अटवाल, चंड़ीगढ़ से पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल और अभिनेत्री किरण खेर, झारखंड में पूर्व केंद्रीय मेंत्री शिबू सोरेन जैसे कई दर्जन सियासी दिग्गजों का इस चरण में सियासी भविष्य तय होना है।

क्या है दलों के सामने चुनौती- इस चरण में जिन 59 सीटों पर चुनाव होना है उनमें पिछले चुनाव में राजग के कब्जे में आई 39 सीटें आई थी। जबकि उसके सहयोगी दलों में चार शिरोमणी अकाली दल, एक जदयू और एक अपना दल के पास है। पश्चिम बंगाल की सभी नौ सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। इसके अलावा कांग्रेस और आप के 4-4, आरएलएसपी व झामुको के 2-2 तथा सपा के एक सीट कब्जे में है। हालांकि बिहार में आरएलएसपी पिछला चुनाव राजग के साथ मिलकर लड़ी थी, जिसके कारण राजग के सामने उन सीटों को भी देखें तो 39 सीटों को बचाने की चुनौती होगी।

पूर्वांचल में है मुख्य दंगल- यूपी में सातवें चरण में पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, अनुप्रिया पटेल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, रमापति राम त्रिपाठी, अभिनेता रवि किशन, आरपीएन सिंह समेत कई नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस चरण में महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर व राबर्ट्सगंज में मतदान होना है। पूर्वांचल में सातवें चरण की 13 सीटों पर होने वाले चुनाव में सपा 8 और बसपा 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा 11 और उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) मिर्जापुर व राबर्ट्सगंज सीटों पर चुनाव मैदान में है। कांग्रेस 11 और उसकी सहयोगी जन अधिकार पार्टी एक सीट पर लड़ रही है।

बिहार में कैसा होगा चुनावी दंगल- सातवें चरण में बिहार में आठ लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। ये सीटें नालंदा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम, काराकट और जहानाबाद हैं। 2014 में इन आठ सीटों में बीजेपी सात और एक सीट आरएलएसपी जीतने में कामयाब रही थी। इनमें पांच सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं। इन पांचों सीटों में चार पर केंद्र सरकार के मंत्री हैं। पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद, पाटिलपुत्र से रामकृपाल यादव, आरा से आरके सिंह और बक्सर से अश्विनी चौबे चुनाव मैदान में हैं।

पश्चिम बंगाल में वजूद की लड़ाई- प. बंगाल की 9 सीटों पर सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए करो या मरो की स्थिति है। चुनाव दमदम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, डायमंड हार्बर, जाधवपुर, कोलकाता दक्षिण और कोलकाता उत्तर सीट पर है। 2014 में इन सभी 9 सीटें टीएमसी को मिली थी। इस बार भाजपा और वाम मोर्चा कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी पुराना प्रदर्शन दोहराती हैं तो केंद्र की राजनीति में उनका रुतबा बढ़ेगा। औसत या बुरे प्रदर्शन की कीमत विधानसभा चुनाव में चुकानी होगी।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की चुनौती- मध्य प्रदेश में देवास, उज्जैन, मंदसौर,  खरगौन, खंडवा, रतलाम और धार सीट पर चुनाव है। 2014 में इन सभी आठों सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। हालांकि बाद में रतलाम सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इस तरह से मौजूदा समय में 7 सीटें बीजेपी के पास है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सामने भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए बेहतर प्रदर्शन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। पार्टी को स्वशासित राज्य में बेहतर प्रदर्शन कर यह सिद्ध करना है कि विधानसभा में उसे मिली जीत महज संयोग नहीं था।

पंजाब में दांव पर आप का भविष्य- आखिरी चरण में पंजाब की सभी 13 यानी गुरदासपुर, अमृतसर, जालंधर, होशियारपुर, आनंदपुर साहिब, लुधियाना, फतेगढ़ साहिब, फरीदकोट, फिरोजपुर, बठिंडा, संगरुर, पटियाला और खडूर साहिब सीट पर चुनाव है। 2014 के चुनाव में इन 14 सीटों में आम आदमी पार्टी 4, अकाली दल 4, कांग्रेस 3 और बीजेपी ने 2 सीटें जीती थी।  इस बार के चुनाव में सबसे बड़ी प्रतिष्ठा आम आदमी पार्टी की लगी है। 2014 से लेकर 2019 आते-आते पार्टी के लिए स्थिति इतनी विपरीत हो चुकी है कि पिछले नतीजे को दोहराना आसान नहीं है।

हिमाचल में भी दलों की चुनौतियां- हिमाचल की सभी चार सीटों हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा और शिमला पर आखिरी चरण में मतदान होना है। 2014 में सूबे में क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा के सामने चारों सीटें बरकरार रखना चुनौती है। हालांकि लोकसभा चुनाव में हार के बाद हिमाचल में भी सत्ता गंवा चुकी कांग्रेस ने वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस की तरफ से चुनाव प्रचार की कमान वीरभद्र ने संभाल रखी है। इसके चलते यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इन सबके अलावा झारखंड की राजमहल, दुमका, गोड्डा और चंडीगढ़ सीट पर भी आखिरी चरण में मतदान होना है।

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