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कई कृषि उत्पादों को किया आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर

नई दिल्ली। मोदी कैबिनेट की केंद्रीय समिति की बैठक में बुधवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई, जिसमें देश के किसानों को कोरोना संकट से राहत देने और उनकी अर्थव्यवस्था में सुधार करने की दिशा में आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से अनाज, तेल, तिलहन, दाल, प्याज, आलू आदि को इस कानून से बाहर कर दिया गया है। अब किसान मर्जी से निर्यात और भंडारण कर सकेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई में बुधवार को कैबिनेट की बैठक में किये गये फैसलों की जानकारी देते हुए एक संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि आवश्यक वस्तु कानून में किसान हितैषी सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। अनाज, तेल, तिलहन, दाल, प्याज, आलू आदि को इससे बाहर कर दिया गया है। अब किसान मर्जी के मुताबिक निर्यात और भंडारण कर सकेंगे। जावड़ेकर ने कहा कि पीएम की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि से संबंधित तीन और अन्य तीन फैसले लिए गए। कृषि को लेकर ऐतिहासिक फैसले हुए हैं। किसानों की 50 साल पुरानी मांगे पुरी हुई है। अतिआवश्यक वस्तु कानून में किसान हितैषी सुधार किए गए हैं। यह कानून तब बना था जब देश में किल्लत होती थी। आज कोई किल्लत नहीं है कृषि उत्पादन की। इसलिए ऐसे समय में ऐसे बंधन डालने वाले कानून की जरूरत नहीं थी। पहले शक्कर राशन की दुकानों में सस्ती मिले इसके लिए शक्कर पर लेवी होती थी। अभी भी ऐसे प्रावधान हैं कि कीमतें बढ़ती हैं तो किसानों पर बंधन होती है। आवश्यक वस्तु अधिनियम की लटकती तलवार ने निवेश, निर्यात को रोका। आज इसे खत्म किया गया है। इसका परिणाम होगा कि किसानों अच्छी कीमत मिलेगी।  अनाज, तेल, तिलहन, दाल, प्याज, आलू ऐसी वस्तुएं आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर कर दिया गया है। अब किसान तय प्लान के मुताबिक निर्यात, भंडारण कर सकता है। केवल जब बहुत ही विशेष आपदा होगी, प्राकृतिक आपदा या अत्यधिक महंगाई हो गई या कोई युद्ध हो गया, ऐसे किसी बड़े कारण में ही ये बंधन लग सकते हैं। किसान  50 सालों से इसकी मांग कर रहे थे।

जावड़ेकर ने कहा कि आवश्यक वस्तु कानून में किसान हितैषी सुधार किए गए हैं। आज कृषि उत्पादों की बहुतायत है इसलिए ऐसे बंधनों वाले कानून की जरूरत नहीं थी। एग्रीकल्चर प्रोड्युसर मार्केट कमेटी के बंधन से किसान आजाद हुआ है। कहीं भी उत्पाद बेचने और ज्यादा दाम देने वाले को बेचने की आजादी मिली है किसान को। वन नेशन वन मार्केट की दिशा में हम आगे बढ़े हैं। कोई निर्यातक प्रोसेसर है, तो उसको कृषि उपज दोनों आपसी समझौते के तहत बेचने की सुविधा मिली है, जिससे सप्लाई चेन खड़ी होगी। भारत में पहली बार ऐसा किया गया है। जावड़ेकर ने बताया कि सरकार ने सभी मंत्रालय और विभागों में एंपावर्ड ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज और प्रॉजेक्ट डिवेलपमेंट सेल बनाने का फैसला लिया है। इससे देश में निवेश बढ़ेगा। इसके अलावा फार्माकोपिया कमीशन की स्थापना का निर्णय लिया गया है। आयुष मंत्रालय की गाजियाबाद की दो लैब्स का भी इसके साथ मर्जर हो रहा है। ये दूसरी ड्रग्स के स्टैंडर्डाइजेशन को सुनिश्चित करेगा।

तीन अध्यादेशों को मंजूरी-इस मौके पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन के सहित उनके हित में तीन अध्यादेशों को मंजूरी दी गई है। यह किसानों के लिए ऐतिहासिक दिन है। इसके अलावा फार्माकोपिया कमीशन की स्थापना का निर्णय लिया गया है। आयुष मंत्रालय की गाजियाबाद की दो लैब्स का भी इसके साथ मर्जर हो रहा है। ये दूसरी ड्रग्स के स्टैंडर्डाइजेशन को सुनिश्चित करेगा।

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