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शुरू होने से पहले ही वापस हुआ ट्रेनों में मालिश-मसाज का प्रस्ताव

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नई दिल्ली। ट्रेन में मालिश-मसाज की सुविधा मुहैया कराने की भारतीय रेलवे की पहल की कड़ी आलोचना के बाद रेल मंत्रालय ने अपने इस प्रस्ताव को वापस ले लिया। इस रेलवे के इस प्रस्ताव का विरोध पहले इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने की इसके बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की। मालूम हो कि अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए रेलवे इंदौर से चलने वाली 39 रेलगाड़ियों में इस योजना को शुरू करने जा रही थी।
रेलवे की इस नवाचारी योजना पर इंदौर से भाजपा सांसद शंकर लालवानी के बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को शुक्रवार को पत्र लिखा। महाजन के स्थानीय कार्यालय के एक कर्मचारी ने यह पत्र लिखे जाने की शनिवार को पुष्टि की। पत्र में लोकसभा अध्यक्ष ने गोयल से जानना चाहा है कि क्या पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल की प्रस्तावित मालिश योजना को रेल मंत्रालय ने मंजूरी दी है? महाजन ने पत्र में पूछा कि इस प्रकार की (मालिश) सुविधा के लिये चलती रेलगाड़ी में किस तरह की व्यवस्था की जायेगी क्योंकि इससे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा एवं सहजता के संबंध में कुछ प्रश्न हो सकते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने अपने पत्र में रेल मंत्री से यह भी जानना चाहा है कि क्या इंदौर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर मसाज पार्लर खोले जाने का भी कोई प्रस्ताव है? लालवानी ने भी गोयल को 10 जून को लिखे पत्र में भारतीय संस्कृति के मानकों का हवाला देते हुए रेलवे की प्रस्तावित मालिश सेवा को स्तरहीन बताया था। उन्होंने योजना को लेकर जनमानस की भावनाओं के मुताबिक पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। अभी इस योजना को शुरू करने की तारीख की घोषणा नहीं की गई है, इसके पहले ही प्रस्ताव खटाई में पड़ता दिख रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि रेल मंत्रालय ने अपना प्रस्ताव वापस लेने का निर्णय लिया है।
हालांकि रतलाम रेल मंडल के अधिकारी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि चलती ट्रेनों में सुबह छह से रात 10 बजे के बीच प्रस्तावित सेवा के तहत यात्रियों के पूरे शरीर की नहीं, बल्कि सिर और पैर जैसे अंगों की मालिश की जायेगी। इस सेवा के बदले यात्रियों से 100 रुपये, 200 रुपये और 300 रुपये की तीन अलग-अलग पैकेज श्रेणियों में शुल्क लिया जायेगा। अधिकारियों के मुताबिक प्रस्तावित मालिश सेवा के लिये एक निजी एजेंसी से करार किया गया है। इस सेवा से रेलवे के खजाने में सालाना 20 लाख रुपये जमा होने की उम्मीद है। चलती ट्रेन में यात्रियों को यह सेवा प्रदान करने वाले लोगों को रेलवे अनुमानित तौर पर करीब 20,000 यात्रा टिकट भी बेचेगा जिससे उसे हर साल लगभग 90 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी।

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