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गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन:आइंस्टीन के सिद्धांत को दी थी चुनौती

नई दिल्ली। महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरुवार को बिहार की राजधानी पटना में निधन हो गया है। वे 77 साल के थे। सिंह करीब 40 साल से सिजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित थे। यहां राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने उनके निधन पर शोक जताते हुए श्रद्धांजलि दी है। हरिवंश ने लंबे समय से बीमार चल रहे मशहूर गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा है वशिष्ठ नारायण सिंह अद्भुत प्रतिभाशाली व्यक्ति थे। ज्ञान और मेधा की दुनिया में भारत की ओर से वे एक चमकते सितारे थे। उनके निधन से  वह सितारा अस्त हो गया। पर गणित की दुनिया में किए गए अपने मौलिक काम की वजह से वह हमेशा ज्ञान की दुनिया में अमर रहेंगे। हरिवंश ने वशिष्ठ बाबू को याद करते हुए कहा कि पत्रकारिता करते हुए वह जिस अखबार में काम करते थे, उस अखबार के जरिये न सिर्फ वशिष्ठ बाबू पर विशेष सामग्री का प्रकाशन कई बार किये-करवाये थे, बल्कि जब उनकी तबियत खराब हुई थी तो इलाज के सहयोग के लिए नागरिकों से आर्थिक सहयोग करने का आह्वान भी किये थे,अभियान भी चलाये थे, जिसका असर हुआ था और लोगों ने सहयोग किया था।

नीतीश ने जताया शोक

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर शोक जताते हुए इसे समाज और बिहार के लिए एक बड़ा नुकसान बताया। उनके एक करीबी ने बताया कि फिलहाल पटना में रहने वाले सिंह की आज सुबह तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर तत्काल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बिहार के भोजपुर के बसंतपुर के रहने वाले सिंह की तबीयत पिछले महीने भी खराब हुई थी, जिनका इलाज पीएमसीएच में ही कराया गया था, बाद में इन्हें छुट्टी दे दी गई थी। कहा जाता है कि उन्होंने आंइस्टीन के सापेक्ष सिद्घांत को चुनौती दी थी। गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह अपने शैक्षणिक जीवनकाल से ही कुशाग्र रहे हैं।

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