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पारंपरिक औषधीय इलाज को बढ़ाने में जुटा आयुष मंत्रालय

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नई दिल्ली। जमीनी स्तर पर पारंपरिक औषधीय सेवाओं की आपूर्ति के लिये आयुष मंत्रालय देशभर में 12,500 स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों की पहचान की प्रक्रिया में है। जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए मंत्रालय का विशेष फोकस निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार का लक्ष्य मधुमेह एवं मोटापा जैसे गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते मामलों पर रोक के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एलोपैथी के साथ-साथ पारंपरिक औषधि थेरेपी को शामिल कर अपनी प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत’ को मजबूती प्रदान करना है। सभी के लिये स्वास्थ्य के लक्ष्य को हासिल करने के लिये मंत्रालय ‘आयुष्मान भारत’ के दो स्तंभों स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों (एचडब्ल्यूसीएस) और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के सहज एकीकरण पर जोर दे रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर खासकर 2016 में गैर-संक्रामक रोग के उपचार के लिये प्रायोगिक परियोजना के तौर पर तीन जिलों भीलवाड़ा (राजस्थान), सुरेंद्रनगर (गुजरात) और गया (बिहार) में आयुर्वेदिक औषधि, आहार संबंधी एवं योग कक्षाएं शुरू किये जाने पर इस संबंध में सफलता मिलने के बाद आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति की आवश्यकता महसूस की गयी है। एक अधिकारी ने बताया कि उदाहरण के लिये वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने मधुमेह रोधी आयुर्वेदिक दवा बीजीआर 34 विकसित किया है जो मधुमेह के उपचार में मील का पत्थर साबित हुआ है।

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