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अल्पसंख्यकों के 15 सूत्री कार्यक्रम: राज्यसभा में हर तीसरे महीने समीक्षा करने की उठाई मांग

नई दिल्ली। बीजू जनता दल (बीजद) के एक सदस्य ने मंगलवार को राज्यसभा में अल्पसंख्यकों के लिए चलाए जा रहे 15 सूत्री कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में खामियों का मुद्दा उठाया और तीन सुझाव प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि यदि सरकार इन पर भी अमल कर ले तो अल्पसंख्कों के हितों में बहुत कुछ हो सकता है। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान दस मामले को उठाते हुए बीजद के मुजीबुल्ला खान ने कहा कि पीएम 15 सूत्री कार्यक्रम में 18 प्रमुख बिन्दु हैं। इन पर अगर ठीक से काम हुआ होता तो कई लोग गरीबी की रेखा से ऊपर उठ गए होते। उन्होंने कहा कि इंदिरा आवास योजना के तहत 15 प्रतिशत आवास अल्पसंख्यकों के लिए बनाए जाने का प्रावधान है लेकिन कई राज्य इसका पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यदि तीन बिन्दुओं पर भी काम करे तो अल्पसंख्यकों के लिए बहुत कुछ हो सकता है। उन्होंने अल्पसंख्यकों की आबादी को ध्यान में रखकर बजट तैयार करने, जिन राज्यों में अल्पसंख्यक आयोग नहीं है वहां इसका गठन करने और 15 सूत्री कार्यक्रम की प्रत्येक तीन महीने में समीक्षा करने का सुझाव दिया। भाजपा के श्वेत मलिक ने धार्मिक नगरियों अयोध्या और अमृतसर के बीच रेल चलाने की मांग की। दोनों शहरों के धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों विशेष धार्मिक शहरों के बीच रेल के परिचालन से लोग इन स्थलों का दर्शन कर सकेंगे। कांग्रेस के एल हनुमंथैया ने लक्षद्वीप में कम होती अपराध दर का हवाला देते हुए असामाजिक गतिविधि रोकथाम (पासा) अधिनियम को स्थगित करने की मांग की। भाजपा के विजपाल तोमर ने विशेष उल्लेख के जरिए मेरठ के निकट स्थित हस्तिनापुर के विकास का मामला उठाया और उसे कुरुक्षेत्र से जोड़ने के लिए रेल सेवा आरंभ करने की मांग की।

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