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असंभव है 6 माह से अधिक की मोरेटोरियम अवधि, सुप्रीम कोर्ट में आरबीआई ने दिया शपथपत्र

नई दिल्ली। लोन मोरेटोरियम मामले में भारतीय रिजर्व बैंक ने शनिवार को हलफनामा दायर किया। इसके जरिए बैंक ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से प्रभावित इलाकों में राहत देना संभव नहीं है। बैंक का कहना है कि 6 माह से अधिक का समय देने का मतलब पूरी तरह से क्रेडिट से जुड़े नियमों भंग करना है। आरबीआई  की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि दो करोड़ तक के कर्ज के लिए ‘ब्याज पर ब्याज’ माफ किया जा सकता है, लेकिन इसके अलावा कोई और राहत देना राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के लिए नुकसानदेह होगा। आरबीआई ने हलफनामे में कहा कि छह महीने से अधिक मोरेटोरियम लोन लेने वालों का क्रेडिट व्यवहार प्रभावित होगा। साथ ही निर्धारित भुगतानों को फिर से चालू करने में देरी हो सकती है जिससे अर्थव्यवस्था में ऋण निर्माण की प्रक्रिया पर भी असर होगा। आरबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि पहले ही सरकार ने 2 करोड़ तक के छोटे कर्ज पर चक्रवृद्धि ब्याज नहीं लेने का फैसला किया है और अब कर्ज का भुगतान न करने वाले सभी खातों को एनपीए घोषित करने पर लगी रोक को हटा देना चाहिए, ताकि बैंकिंग व्यवस्था में सुधार हो सके।

अगली सुनवाई 13 को-सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्तूबर तक नया हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने याचिकाओं पर सुनवाई की। इससे पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक अक्टूबर तक हलफनामा दायर करने का समय दिया था और बैंकों से अभी एनपीए घोषित नहीं करने को कहा गया था। इससे पहले 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम की अवधि के दौरान स्थगित ईएमआई में ‘ब्याज पर ब्याज ‘ में छूट को लेकर सुनवाई की थी और आरबीआई से केवी कामथ कमिटी की सिफारिशों को रिकाॅर्ड पर रखने को कहा है।कोर्ट ने कहा था कि ब्याज पर राहत देने की जो बात की गई, उसके लिए केंद्रीय बैंक द्वारा किसी तरह का दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया। वित्त मंत्रालय ने 2 अक्टूबर को कोर्ट में अतिरिक्त हलफनामा दायर कर कहा था कि इसने मध्यम और छोटे उद्योगों के साथ-साथ व्यक्तिगत कर्ज लेने वालों के लिए 2 करोड़ तक के लोन पर चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने का फैसला किया था। आरबीआई ने 27 मार्च को बैंकों व वित्तीय संस्थानों को 1 मार्च 2020 तक बकाया सभी टर्म लोन्स के बॉरोअर्स को ईएमआई के भुगतान पर 3 माह का मोरेटोरियम उपलब्ध कराने को कहा था। इस विकल्प में ग्राहक मार्च, अप्रैल और मई माह की अपनी ईएमआई चाहें तो होल्ड कर सकते हैं।

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