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आतंकी फंडिंग मामले में एनआईए ने अब तक दर्ज किए 94 मामले: केंद्र

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में आतंकी फंडिंग से संबंधित अब तक 94 से अधिक मामले दर्ज किए हैं। मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। लोकसभा में एक सवाल पूछा गया था कि क्या देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी फंडिंग के मामले आए हैं और क्या सरकार ने उनकी जांच कराने पर विचार किया? इसके जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा कि भारत के संविधान की सातवीं सूची अनुसार, पुलिस और कानूनी व्यवस्था बनाए रखना राज्य के विषय हैं, ऐसे में अपराधों की रोकथाम और जांच कर अपराधियों को पकड़ने की पहली प्राथमिकता राज्य पुलिस की है। गृह मंत्रालय ने बताया कि केंद्र सरकार ने अब तक आतंकवादी वित्तपोषण से संबंधित 94 मामले जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपे हैं।देश में आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत कार्रवाई की जाती है।

केंद्रीय सशस्त्र बलों के 96 हजार से ज्यादा जवानों ने सेवाएं छोड़ी-केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि वर्ष 2011 से एक मार्च 2021 के बीच केंद्रीय सशस्त्र बलों यानी सीएपीएफ और असम राइफल्स के 81,007 जवानों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और 15,904 ने त्यागपत्र देकर नौकरी छोड़ दी। कांग्रेस सांसद दीपक बैज के एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार इन वर्षों के दौरान वीआरएस लेने वालों या इस्तीफा देने वालों की संख्या हर साल कम-ज्यादा होती रही। सेवाएं छोड़ने की वजह को लेकर कोई विशेष अध्ययन नहीं कराया गया है।

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