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गन्ना आपूर्ति हेतु पर्ची निगर्मन व्यवस्था जिलाधिकारी के निशाने पर 

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मुजफ्फरनगर- जनपद मुजफ्फरनगर के विभिन्न विभागों में चल रही धांधली की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय ने अभियान छेड़ रखा है। इस कड़ी में अब गन्ना आपूर्ति हेतु पर्ची निगर्मन व्यवस्था उनके निशाने पर है। जिलाधिकारी ने गन्ना विभाग एवं राजस्व विभाग के फील्ड लेविल अधिकारियों की अलग-अलग बैठक कर गन्ना पर्ची आपूर्ति में किसी भी तरह की धांधली को रोकने के लिए धारदार योजना तैयार की है। वर्तमान में किसानों के बोये हुए गन्ने का सर्वेक्षण कार्य 01 मई से 30 जून के मध्य किया जाता है। गन्ना सर्वेक्षण हेतु विभागीय निर्देशानुसार 500 से 1000 हेक्टेयर की अस्थाई सर्किलें बनायी जाती हैं। प्रत्येक सर्किल के गन्ना सर्वेक्षण हेतु संयुक्त टीम बनाई जाती है, जिसमें एक राजकीय/विभागीय कर्मचारी तथा दूसरा चीनी मिल कर्मचारी की व्यवस्था है। 

जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय को विभिन्न स्रोतों से यह ज्ञात हुआ है कि गन्ना समिति में किसानों का कृषि क्षेत्रफल शुद्ध दर्ज नहीं किया जाता है और धांधली करके कृषकों की भूमि वास्तविक क्षेत्रफल से कहीं अधिक दर्ज कर दी जाती है। चीनी मिल मोरना, टिकौला व भसाना को छोड़कर अन्य चीनी मिलें अपने निहित स्वार्थवश गन्ना सर्वेक्षण में सहयोग भी नहीं करती हैं। जिलाधिकारी ने गन्ना विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 01 मई से प्रारम्भ होने वाले गन्ना सर्वेक्षण को नियमानुसार शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाये और प्रति सप्ताह कितना सर्वेक्षण गन्ना विभाग द्वारा किया जा रहा है, उसकी सूची उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी ने गन्ना विभाग की सर्वेक्षण टीम के साथ इस माह के अंत में एक बैठक भी निर्धारित की है। वहीं दूसरी ओर उप जिलाधिकारियों के माध्यम से लेखपालों को निर्देश दिया गया है कि वह इसी अवधि में कृषकों द्वारा बोये गए गन्ना क्षेत्रफल का आकलन पड़ताल के दौरान खसरों में अंकित करें। गन्ना विभाग एवं राजस्व विभाग द्वारा गन्ने की बोई गई फसल का काश्तकार वार मिलान किया जायेगा। यदि दोनों के सर्वेक्षण में अंतर आता है तो राजस्व निरीक्षक के नेतृत्व में टीम बनाकर अंतर का सत्यापन कराया जायेगा। सत्यापन में गन्ना क्षेत्रफल गलत पाये जाने पर सम्बन्धितों के विरूद्ध कठोरतम कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। इसके पश्चात गन्ना विभाग के सर्वेक्षण व राजस्व विभाग के सर्वेक्षण के उपरांत कानूनगो, तहसीलदार, उपजिलाधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी से सत्यापन कराया जायेगा। जिस स्तर पर भी विसंगतियां पाई जायेंगी, उस विभाग के कर्मचारियों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। सर्वेक्षण शुद्ध होने का परिणाम यह होगा कि कोई भी गन्ना माफिया जोत से अधिक गन्ना पर्ची जारी कराके मुनाफा नहीं कमा सकेगा और असल काश्तकार के हक पर चोट नहीं कर पायेगा। इस सत्यापन में भूमिहीन, मृतक एवं डबल सदस्यों की प्रविष्टि का डाटा पूर्ण रूप से समाप्त हो जायेगा। जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय के इस अभियान से गन्ना माफियाओं में खलबली मची हुई है। 

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