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पीएम मोदी की ‘स्वामित्वा’ स्कीम,देशभर के 763 गांवों के 1.32 लाख लोगों को सौंपे जाएंगे कागजात

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा कुछ अलग करने के लिए जाने जाते हैं। 2014 को जब पीएम नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तो एक के बाद एक उनके फैसले चौंकाने वाले थे। शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को बुलाने का फैसला भी सबको चौंकाने वाला था। इसके बाद जन-धन योजना, उज्जवला योजना, आधार कार्ड को कैसे हर चीज को जोड़ दिया ये सब उनके फैसलों से लोगों को बहुत फायदा और चीजे आसान हो गई। अब पीएम मोदी रविवार को ग्रामीण इलाकों की संपत्तियों से जुड़ी भौतिक प्रतियां उनके मालिकों को सौंपने जा रहे हैं। ये प्रक्रिया केंद्र सरकार के द्वारा शुरू की गई योजना ‘स्वामित्वा’ के जरिए पूरी की जा रही है।

रविवार को होगी शुरूआत-रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के 763 गांवों के 1.32 लाख लोगों को आबादी की जमीन के मालिकाना हक के कागज़ात सौपेंगे।स्वामित्वा योजना से लोगों की संपत्ति का डिजिटली ब्योरा रखा जा सकेगा। ऐसा होने के बाद लोगों को इसके बहुत फायदें होंगे। इससे ग्रामीण संपत्ति के मालिकों को आर्थिक फायदा होगा और संपत्ति को लेकर होने वाले झगड़े भी खत्म होंगे जो कभी-कभी दशकों तक चलते थे।

तैयार किया जाएगा नक्शा-पीएम मोदी जो भौतिक प्रतियां इनको सौंपेंगे उससे मालिकों द्वारा लोन लेने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और यह ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों का रिकॉर्ड रखने में भी मदद करेगा। वर्तमान में ऐसा कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। 24 अप्रैल को पीएम द्वारा शुरू की गई ‘स्वमित्वा’ परियोजना के तहत प्रतियों को सौंप दिया जाएगा और 2024 तक 6.40 लाख गांवों के सभी शहरी या अबादी (आबादी वाले) क्षेत्रों का नक्शा तैयार किया जाएगा।

डिजिटल कार्ड भी मिलेंगे-इस मामले के जानकार लोगों ने कहा कि हरियाणा के 221, कर्नाटक के दो, महाराष्ट्र के 100, मध्य प्रदेश के 44, उत्तर प्रदेश के 346 और उत्तराखंड के 50 लोगों सहित 763 गांवों के हाउस मालिकों को फिजिकल कॉपी के साथ-साथ डिजिटल संपत्ति कार्ड भी प्राप्त होंगे। ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में निवासियों की भूमि का इस्तेमाल ड्रोन के जरिए नई सर्वेक्षण विधियों का उपयोग करके किया जाएगा जिसमें पंचायती राज मंत्रालय, राज्य राजस्व विभागों और भारतीय सर्वेक्षण मंत्रालय की मदद मिलेगी। यह न केवल ग्रामीण घरेलू मालिकों को अपने घरों को ऋण के लिए जमानत के रूप में उपयोग करने में सक्षम करेगा, बल्कि महंगी ग्रामीण मुकदमेबाजी में भी कटौती करेगा।

ये विभाग की सहायता करेंगे-राजस्व विभाग के स्थानीय प्रतिनिधि और अन्य संबद्ध विभागों के प्रतिनिधि निवासियों की उपस्थिति में लोगों के स्वामित्व का रिकॉर्ड तैयार करेंगे। इतना ही नहीं लोगों ने बताया कि इसके साथ ही विवादों के मौके पर निपटान के लिए एक अलग व्यवस्था तैयार की गई है। इन लोगों ने बताया शुरुआत से ही भारत के गांव अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं। भू-राजस्व राज्य की आय का मुख्य स्रोत था।

विवादों से निपटारा-आबादी वाली जमीन में किसी भी प्रकार के स्वामित्व रिकॉर्ड या सीमांकन के अभाव के कारण, जब भी कब्जे, जल निकासी, या सीमाओं के बारे में कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो पार्टियों को विवादों के निपटारे के लिए एक नागरिक अदालत में जाना पड़ता है, एक लंबी प्रक्रिया जो कभी-कभी पीढ़ियों तक चलती है, हमारे देश की दीवानी अदालतों में लंबित मामलों की कुल संख्या में से, कम से कम 40% विवादित भूमि से संबंधित हैं।फोटो साभार-jagran.com

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