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संसद ने मनाई संविधान की 70वीं वर्षगांठ: संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता के कारण हम सब सुरक्षित- राष्ट्रपति

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संविधान दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर संसद के संयुक्त सदन की बैठक में कहा कि संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता के कारण आज हम सब देश में सुरक्षित है। उन्होंने मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों को एक सिक्के के दो पहलू बताते हुए कि अधिकारों के साथ हमे अपने कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए।भारतीय संविधान दिवस पर संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर, संविधान-सम्मत प्रक्रियाओं का पालन करने को संवैधानिक नैतिकता का ‘सार-तत्व’ बताया और कहा कि देश में हर प्रकार की परिस्थिति का सामना करने के लिए संविधान सम्मत रास्ते उपलब्ध हैं और इसलिये संविधान की मर्यादा, गरिमा और नैतिकता के अनुरूप काम करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हम सभी को संवैधानिक मूल्यों, ईमानदारी को अपनाते हुए भय, प्रलोभन, पक्षपात, राग द्वेष एवं भेदभाव से मुक्त रहकर काम करने की आवश्यकता है। ऐसे में संविधान निर्माताओं की भावना को शुद्ध अंत:करण से अपनाना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि भय, प्रलोभन, राग-द्वेष, पक्षपात और भेदभाव से मुक्त रहकर शुद्ध अन्तःकरण के साथ कार्य करने की भावना को हमारे महान संविधान निर्माताओं ने अपने जीवन में पूरी निष्ठा व ईमानदारी से अपनाया था। उनमें यह विश्वास जरूर रहा होगा कि उनकी भावी पीढ़ियां, अर्थात हम सभी देशवासी भी, उन्हीं की तरह, इन जीवन-मूल्यों को, उतनी ही सहजता और निष्ठा से अपनाएंगे।

संवैधानिक मूल्यों के प्रति संकल्पबद्धता जरुरी: नायडू

संविधान दिवस के अवसर पर मंगलवार को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने ‘भारतीय संसदीय लोकतंत्र में राज्यसभा की भूमिका’ नामक पुस्तक को जारी किया और इसकी पहली प्रति राष्ट्रपति कोविंद को भेंट की। नायडू ने इस मौके पर देश के नागरिकों का आह्वान किया कि यदि वे प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों को निभायें तथा राष्ट्रीय उद्देश्यों एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति संकल्पबद्ध रहें तो देश का तेजी से विकास हो सकता है और यह अधिक परिपक्व लोकतंत्र बन सकता है। नायडू नेदेशवासियों से संविधान की मान्यताओं और मर्यादाओं के संरक्षण और संवर्धन के प्रति पुन: संकल्पबद्ध होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि हम प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों को निभायें तथा राष्ट्रीय उद्देश्यों एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति संकल्पबद्ध रहें तो देश का तेजी से विकास हो सकता है और यह अधिक परिपक्व लोकतंत्र बन सकता है।

अधिकारो व कर्तव्यों का संतुलन जरुरी: मोदी

संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा संविधान हमारे लिए सबसे बड़ा और पवित्र ग्रंथ है। हमारा संविधान इतना व्यापक इसलिए है, क्योंकि उसने बाहर के प्रकाश के लिए अपने खिड़कियां खुली रखी हैं। भारतीय संविधान ने दो मंत्रों ‘भारतीयों के लिए गरिमा’ और ‘भारत की एकता’ को साकार किया है। उन्होंने भारतीय नागरिकों का आह्वान किया कि हम सब देश के नव नागरिक और नेक नागरिक बनें। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे संविधान की मजबूती के कारण ही हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की तरफ आगे बढ़ पा रहे हैं। भारतीयों के लिये गरिमा और भारत की एकता के लिए संविधान ने इन दो मंत्रों को साकार किया है। उन्होंने कहा कि संविधान अधिकारों के प्रति सजग एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाता है, ऐसे में हमें नागरिक के तौर पर अधिकारों एवं कर्तव्यों में संतुलन बनाना होगा। उन्होंने कहा कि अधिकारों और कर्तव्यों के बीच के इस रिश्ते और इस संतुलन को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने बखूबी समझा था। आज जब देश पूज्य बापू की 150वीं जयंती का पर्व मना रहा है तो उनकी बातें और भी प्रासांगिक हो जाती हैं।

संविधान को असंतुलित न करें: बिरला

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अनुशासन को मौलिक अधिकारों द्वारा प्रदान की गई स्वतंत्रता और शक्तियों के प्रयोग की एक जरूरी शर्त बताते हुए कहा कि कर्तव्यों से विमुख होकर सिर्फ अधिकारों की बात करने से एक प्रकार का असंतुलन पैदा होगा। उन्होंने कहा संविधान में जहां एक तरफ मौलिक अधिकारों के रूप में हमें पर्याप्त स्वतंत्रता और शक्तियां दी गई हैं, वहीं दूसरी तरफ संतुलन बनाते हुए मौलिक कर्तव्यों का निर्देश करके हमें अनुशासित भी किया है।

स्मारक सिक्के और डाक टिकट जारी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को संविधान दिवस के अवसर पर 250 रुपये के स्मारक सिक्के और एक विशेष डाक टिकट को जारी किया, वहीं उन्होंने राष्ट्रीय युवा संसद योजना के पोर्टल और संसद भवन के पुस्तकालय में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।संसद के केंद्रीय कक्ष में संविधान को अंगीकार किये जाने के 70 साल पूरे होने के मौके पर लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करने से पहले उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ‘भारतीय संसदीय लोकतंत्र में राज्यसभा की भूमिका’ नामक पुस्तक को जारी किया और इसकी पहली प्रति राष्ट्रपति कोविंद को भेंट की। उन्होंने इस मौके पर संसद भवन के पुस्तकालय भवन में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। जिसमें संविधान के निर्माण से लेकर उसके 70 साल की यात्रा की जानकारी जनप्रतिनिधि एवं अन्य लोग उठा सकेंगे।

विपक्ष ने संसद की संयुक बैठक का बहिष्कार किया

कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने मंगलवार को संविधान दिवस के मौके पर सरकार की तरफ से बुलाए गए संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का बहिष्कार किया और संसद परिसर में भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र के मुद्दे पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कई अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। इन नेताओं ने हाथों में बैनर ले रखा था जिस पर ‘संकट में संविधान’ लिखा था। विपक्षी नेताओं ने ‘संविधान की हत्या बंद करो’ के नारे लगाए।

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