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जेईई-नीट पर छिड़ी सियासी जंग, सोनिया गांधी ने गैरभाजपा 7 राज्यों के सीएम के साथ बैठक की

नई दिल्ली। मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए सितंबर में होने जा रही ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) और नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट) (नीट) को लेकर  सियासी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को सात गैरभाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो लिंक के जरिए बैठक की।

इस वर्चुअल बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संबंधित घोषणाएं वास्तव में हमें चिंतित कर सकती हैं क्योंकि यह वास्तव में एक झटका है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं और परीक्षाओं के मुद्दे से केंद्र लापरवाही से निपट रहा है। बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोविड-19 को लेकर देश में बनी स्थिति के चलते परीक्षा स्थगित कराने के लिए सुपीम कोर्ट जाने का सुझाव दिया। ममता ने कहा, “मेरा सभी राज्य सरकारों से यह अनुरोध रहेगा कि वे एक साथ आएं जब तक छात्रों के परीक्षा में उपस्थित होने की स्थिति नहीं बन जाती उस समय तक परीक्षा स्थगित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट चलें। ममता बनर्जी ने अपने उन दो पत्रों का भी हवाला दिया जो उन्होंने इससे पहले प्रवेश परीक्षा को स्थगित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा था। ममता ने कहा कि परक्षाएं सितंबर में हैं। क्यों छात्रों के जीवन को खतरे में डाला जा रहा है? हमने इस बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा लेकिन वहां से कोई भी जवाब नहीं मिला। विपक्षी दलों की यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब एक दिन पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने सुप्रीम कोर्ट के 17 अगस्त के आदेश का हवाला देते हुए परीक्षा शेड्यूल में बदलाव की मांग को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा स्थगित करने की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि “छात्रों के एक महत्वपूर्ण वर्ष को बर्बाद नहीं किया जा सकता है और जीवन को आगे बढ़ना है।

उद्धव ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अमेरिका की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में 97,000 बच्चे कोरोनो वायरस बीमारी से संक्रमित थे जब स्कूलों को फिर से खोल दिया गया था। “अगर ऐसी स्थिति यहां आएगी तो हम क्या करेंगे?” उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल को जून में नहीं खोला गया जबकि जब मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, तो अब परीक्षाओं को आयोजित करने के लिए स्थिति को कैसे अनुकूल माना जा सकता है। जबकि, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले हमें प्रधानमंत्री या फिर राष्ट्रपति के पास जाना चाहिए। बैठक में ममता, सोरेन और ठाकरे के अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायण सामी भी शामिल थे।

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