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टीकाकरण में आशंकाएं दूर करने की तैयार रणनीति

नई दिल्ली। देश में कोरोना टीकाकरण के साथ इसे लेकर उभरने वाली आशंकाओं को दूर करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने संवाद की रणनीति बनाई है। गुरुवार को यह जारी की गई। इसमें आशंकाओं को दूर कर टीके की स्वीकार्यता सुनिश्चित करने के लिए सही और पारदर्शी सूचना उपलब्ध कराने की बात कही गई है। संवाद की रणनीति 88 पन्नों का दस्तावेज जारी किया गया है। इसमें देश के सभी राज्यों में सभी लोगों को कोविड-19 टीकों और टीकाकरण की प्रक्रिया के बारे में सूचना उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरीय संवाद गतिविधियों के बारे में व्यापक जानकारी उपलब्ध कराई गई है। मंत्रालय ने कहा कि संवाद रणनीति में टीके के बारे में आशंकाओं को दूर कर इसकी स्वीकार्यता सुनिश्चित करने तथा इसे प्रोत्साहन देने के लिए उचित समय पर बिलकुल सही और पारदर्शी सूचना प्रचारित करने की बात कही गई है। दस्तावेज के अनुसार रणनीति टीके की मांग पूरी न होने और लोगों के बीच इसकी उत्सुकता को लेकर पैदा होने वाली किसी संभावित निराशा को प्रबंधित और दूर करने पर केंद्रित है। संवाद की रणनीति किसी मिथक या गलत अवधारणा की वजह से टीके की सुरक्षा और प्रभाव संबंधी आशंकाओं के चलते टीका लगवाने में  ‘झिझक’ जैसी समस्या का समाधान करने पर भी केंद्रित है। यह टीकाकरण कार्यक्रम के दौरान संभावित जोखिम के बारे में सूचना देने तथा किसी अवांछित संकट को कम करने पर भी केंद्रित है। वहीं मंत्रालय ने कहा कि रणनीति पारदर्शिता के जरिए कोविड-19 टीके में लोगों का विश्वास पैदा करने तथा इससे संबंधित किसी गलत सूचना और अफवाहों से निपटने पर भी केंद्रित है। इस उद्देश्य को मंत्रालय तीन तरह से हासिल करना चाहता है, जिसमें सामाजिक प्रभाव या विशेषज्ञों का समर्थन, राष्ट्रीय मीडिया त्वरित प्रतिक्रिया प्रकोष्ठ स्थापित कर इसकी मदद लेने तथा सामुदायिक गतिशीलता एवं अग्रिम पंक्तियों के कर्मियों की मदद लेना शामिल है।

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