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 शादी-समारोह में बंदूक नहीं बनेगी शान,सरकार ने लगाया एक से ज्यादा हथियार रखने पर बैन

नई दिल्ली। अगर आप लाइसेंस के साथ हथियार रखते हैं तो इसके नियम बदलने जा रहे हैं। कैबिनेट से मंजूरी के बाद सोमवार को गृह मंत्रालय 60 साल पुराने आर्म्स एक्ट में संशोधन से जुड़ा बिल पेश कर रहा है।  इस बिल में सजा के कई प्रावधानों को बदला गया है साथ ही अपराध की नई श्रेणियों को भी इस बिल में शामिल किया गया है। बिल के मुताबिक अब कोई भी व्यक्ति एक से ज्यादा हथियार नहीं रख सकता जिसकी सीमा पहले तीन आर्म्स तक थी। आर्म्स अमेडमेंट बिल में अधिकृत डीलर के अलावा किसी को भी एक से ज्यादा अधिकार रखनी की इजाजत नहीं दी जाएगी। वहीं पुलिस का सैन्य बलों से हथियार लूटने के मामले में 10 साल से लेकर उम्र कैद की सजा का प्रावधान बिल में शामिल किया गया है। अंतरराष्ट्रीय शूटिंग खिलाड़ियों को अपवाद के तौर पर एक से ज्यादा आर्म्स रखने की इजाजत मिलेगी लेकिन उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले कारतूस की श्रेणी को तय किया गया है।

हर्ष फायरिंग पर होगी सजा

जश्न के मौकों पर आए दिन हर्ष फायरिंग में हादसों की घटनाएं होती हैं ऐसे में अब इसे अपराध की श्रेणी में लाया जा रहा है. लापरवाही से शादी-बारात में फायरिंग करने वालों पर अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नए बिल में ऐसे अपराध के लिए 2 साल की सजा या एक लाख के जुर्माने का प्रावधान शामिल किया गया है। धार्मिक आयोजनों, शादी समारोह और सार्वजनिक स्थलों पर फायरिंग को कानूनी तौर पर अपराध माना गया है। कानून बनने के बाद एक से ज्यादा हथियार रखने वालों को 90 दिन के भीतर अपना हथियार जमा करना होगा। इसके लिए लाइसेंसधारक को करीबी पुलिस स्टेशन में अपना हथियार तय समयसीमा के अंदर जमा कराना होगा। अगर हथियार किसी सैन्यकर्मी को पास है तो उसे अपनी यूनिट में यह जमा कराना पड़ सकता है। एक से ज्यादा लाइसेंस को कानून लागू होने के एक साल के भीतर रद्द कर दिया जाएगा।

लाइसेंस की वैधता बढ़ेगी

नए कानून में हथियारों की तस्करी और उनके पुरजों की अवैध ब्रिक्री-खरीद को भी अपराध माना गया है। बगैर लाइसेंस के प्रतिबंधित हथियार रखने पर अब तक 7 साल की सजा का प्रावधान था जिसे बढ़ाकर 10 साल किया गया है। अगर प्रतिबंधित हथियार से किसी की मौत हो जाती है तो पहले की तरह नए कानून में भी मौत की सजा या फिर जुर्माने के साथ उम्र कैद को बरकरार रखा गया है। बिल में लाइसेंस की वैधता को तीन से बढ़ाकर पांच साल करने की बात भी कही गई है। नए कानून में सरकार हथियारधारक की निगरानी के लिए भी नियम बना रही है ताकि खरीदे गए बारूद, तस्करी और जांच के बारे में जानकारी जुटाई जा सके हैं।

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