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बसपा ने राजस्थान में गहलोत सरकार की बढ़ाई मुश्किलें

नई दिल्ली। राजस्थान में सियासी संग्राम को अब बसपा ने नया ट्विस्ट दिया है। पार्टी ने अपने उन छह विधायकों को व्हिप जारी कर गहलोत सरकार का समर्थन न करने को कहा है, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस ज्वाइन कर लिया है। पार्टी का कहना है कि बसपा एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल है, जिसका राज्य स्तर पर किसी दूसरे दल में विलय नहीं हो सकता।

बसपा सुप्रीमो मायावती के हवाले से पार्टी महासचिव सतीश मिश्रा ने विधायक आर गुढ़ा, लखन सिंह, दीप चंद, जोगिंदर सिंह अवाना, संदीप कुमार और वाजिब अली को जारी व्हिप में कहा है कि विधानसभा सत्र बुलाए जाने पर मतदान की स्थिति बनती है तो वे कांग्रेस सरकार के पक्ष में वोट न करें। बसपा ने 2006 के सुप्रीमकोर्ट के एक फैसले के हवाले से कहा है कि यदि व्हिप का उल्लंघन किया तो उनकी सदस्यता अयोग्य करार करने की कार्यवाही की जाएगी। 2018 विधानसभा चुनाव में ये विधायक बसपा के टिकट और चिह्न पर चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। पिछले साल अगस्त में इन विधायकों ने बसपा की राजस्थान इकाई के साथ खुद को कांग्रेस में विलय कर दिया। राज्य विधानसभा के अध्यक्ष सी.पी. जोशी ने सदन में इन्हें बतौर कांग्रेस विधायक मान्यता भी दे दी है। राज्यसभा चुनाव में इन सभी विधायकों ने बतौर कांग्रेस विधायक अपना वोट भी किया। लेकिन राज्य के ताजा सियासी हालात में बसपा ने कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी। मुख्यमंत्री अब जब विधानसभा सत्र बुला कर सदन में अपना बहुमत साबित करने की फिराक में हैं तो बसपा ने व्हिप जारी कर पच्चर फंसा दिया।

फिलहाल भाजपा के एक विधायक ने इन छहों विधायकों की दल बदल कानून के तहत सदस्यता खत्म करने संबंधी एक याचिका राजस्थान हाईकोर्ट में लगा रखी है, जिस पर सोमवार, 27 जुलाई को सुनवाई होनी है। वहीं बसपा की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि उसकी ओर से भी सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी, जिसमें बसपा की राजस्थान इकाई और छह विधायकों के कांग्रेस में विलय को चुनौती दी जाएगी।

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