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राज्यसभा ने दी फॉरेंसिक विज्ञान विवि, राष्ट्रीय रक्षा विवि विधेयकों को मंजूरी

नई दिल्ली। राज्यसभा ने मंगलवार को दो अहम विधेयकों को पारित कर दिया जिनमें राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित हैं। लोकसभा दोनों विधेयकों को पहले ही मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 में गुजरात फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के रूप में उन्नयन करने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक के अनुसार प्रस्तावित विश्वविद्यालय से फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा मिलेगा और व्यवहार विज्ञान अध्ययन, अपराध विज्ञान एवं अन्य अनुषांगिक क्षेत्रों में अध्ययन किया जा सकेगा । दोनों विधेयक पर चर्चा के दौरान ज्यादातर विपक्षी दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। हंगामे को लेकर आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित किए जाने के विरोध में विपक्ष के कई दलों के सदस्य सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। विधेयक पर हुयी संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि किसी भी मामले में पुलिस की जांच में फॉरेंसिक विज्ञान पड़ताल की अहम भूमिका होती है। रेड्डी ने कहा कि फॉरेंसिक पेशेवरों की कमी के कारण देश में लगभग 1.5 लाख मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों के 1.14 लाख से अधिक पद हैं और विश्वविद्यालय बनने से इन पदों को भरने में मदद मिलेगी। राज्यसभा ने इसके बाद राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 को संक्षिप्त चर्चा के बाद मंजूरी दी। इस विधेयक में गुजरात में एक राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री रेड्डी ने बताया कि गुजरात सरकार ने गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय शक्ति विश्वविद्यालय को केन्द्रीय संस्थान बनाने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया क्योंकि इससे नये विश्वविद्यालय को बनाने में कम समय और कम आर्थिक संसाधन लगेंगे। विधेयक में गांधीनगर के इस संस्थान का उन्नयन राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के रूप में करने और इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देने का प्रावधान है।

कंपनी संशोधन कानून को संसद की मंजूरी-संसद ने कंपनी कानून में संशोधन के लिए लाये गये एक विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी जो विभिन्न शमनीय (कंपाउंडेबल) कृत्यों को अपराध के दायरे से बाहर करने और देश में कारोबार की सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया है। कंपनी (संशोधन) विधेयक 2020 को राज्यसभा ने संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। चर्चा के दौरान ज्यादातर विपक्षी दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। विपक्ष के आठ सदस्यों को शेष सत्र के लिए निलंबित करने के विरोध में विपक्ष के कई दलों के सदस्य सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। लोकसभा इस विधेयक को 19 सितंबर को पारित कर चुकी है। विधेयक में विभिन्न दंड वाले प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, भारतीय निगमित कंपनियों को विदेशों में सीधे सूचीबद्ध करवाने और मूल कानून में उत्पादक संगठनों से संबंधित एक नया अध्याय जोड़ने का प्रावधान है। विधेयक पर उच्च सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार संशोधनों को लेकर संसद में आती रही है क्योंकि कंपनी कानून 2013 में अभी तक कुछ मुद्दे हैं।

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