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राज्यसभा: संसदीय कैलेंडर साल के शुरू में ही जारी करने की मांग

नई दिल्ली। राज्यसभा में बृहस्पतिवार को एक मनोनीत सदस्य ने संसदीय कैलेंडर साल के शुरू में ही जारी करने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा होने पर संसद सदस्यों को अपने कार्यक्रम एवं योजनाएं तय करने में मदद मिलेगी।

मनोनीत डॉ नरेंद्र जाधव ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा‘‘ विभिन्न परिपक्व लोकतांत्रिक देशों में संसदीय कैलेंडर साल के शुरू में जारी कर दिया जाता है। हमारे देश में भी ऐसा होना चाहिए। इससे संसद सदस्यों को अपने कार्यक्रम एवं योजनाएं तय करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि साल के शुरू में ही तय कर दिया जाए कि संसद सत्र कब कब आयोजित होगा तो यह सबके लिए सुविधाजनक होगा। जाधव ने यह भी कहा कि सालाना संसदीय कैलेंडर तैयार करने की जिम्मेदारी लोकसभा के अध्यक्ष एवं राज्यसभा के सभापति को दी जानी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के अहमद हसन ने चार राज्यों में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के परिसर स्थापित किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के तहत एएमयू का एक परिसर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय में भी स्थापित किया जाना था। इसके लिए राज्य सरकार ने जमीन भी दे दी। लेकिन इसके बाद आवश्यक समुचित कार्य नहीं हो पाया। हसन ने कहा कि संस्थान के पास न तो अपनी खुद की इमारत है, न छात्रावास है। इस वजह से उन करीब 500 छात्रों को अस्थायी ढांचे में पढ़ना पड़ता है जो चार विभागों में अध्ययनरत हैं।

शून्यकाल के दौरान आप सदस्य संजय सिंह ने विनिवेश का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के लाभकारी उपक्रमों के विनिवेश की योजना के कारण इन उपक्रमों में कार्यरत लाखों कर्मियों की नौकरी जाने का खतरा है। सिंह ने कुछ उपक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत पेट्रोलियम कॉर्प लि(बीपीसीएल), शिपिंग कॉर्प ऑफ इंडिया(एससीआई) और कंटेनर कॉर्प ऑफ इंडिया(कॉनकॉर) के विनिवेश के लिए हाल ही में प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये लाभकारी उपक्रम हैं फिर इनका निजीकरण क्यों किया जा रहा है। इस पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने उन्हें यह कहते हुए आगे बोलने की अनुमति नहीं दी कि शून्यकाल में उनका विषय कामगारों की हालत को लेकर था और उन्हें उस पर ही अपनी बात रखनी चाहिए थी। वहीं माकपा सदस्य के सोमप्रसाद ने मांग की कि अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए परिवार की आमदनी ढाई लाख रुपये सालाना होने की सीमा खत्म की जानी चाहिए । उन्होंने कहा कि यह आय सीमा बेहद कम है और इस सीमा की वजह से कई जरूरतमंद छात्र अपनी छात्रवृत्ति से वंचित रह जाते हैं।

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