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छत्तीसगढ़ के नक्सल क्षेत्रों में विकास कार्यो के लंबित प्रस्तावों को मंजूरी देने का अनुरोध

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के नक्सल पीड़ित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराने और विकास कार्यो के लंबित प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है। वहीं उन्होंने बस्तर से वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन के लिए कई नए प्रस्ताव पेश करते हुए उन्हें भी केन्द्र सरकार से स्वीकृति देने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि मुझे आशा है केन्द्र सरकार के आवश्यक सहयोग से बस्तर के लोगों के जीवन स्तर में सुधार और शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय गृह मंत्री को लिखे पत्र में उनके साथ पिछले महीने 16 तारीख को हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा है कि- बैठक में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वृहद पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराए जाने हेतु कार्ययोजना कि जानकारी दी गई थी। उन्होंने पिछले दिनों शाह से हुई मुलाकात का हवाला देते हुए लिखा है कि आपसे हुई चर्चा अनुसार राज्य के पूर्व के लंबित प्रस्तावों एवं नवीन प्रस्तावों को पेश किया। इन प्रस्तावों के साथ बघेल ने पत्र में लिखा है कि विशेष केन्द्रीय सहायता योजना को निरंतरी जारी रखना। स्कीम अंतर्गत 1028 मोबाइल टॉवरों की ब्लैक पैंथर की तैनाती हेतु एक भारत रक्षित वाहिनी के गठन की स्वीकृति। नक्सल विरोधी अभियानों हेतु भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए एनटीआरओ यूएवी में प्रयुक्त कैमरा का रेजुलेशन बढ़ाए जाने एवं के.के. लाईन अंतर्गत रेल्वे संपत्ति एवं दोहरीकरण कार्य की सुरक्षा हेतु कुमारसाडरा (जिला बस्तर) एवं कामालूर, जिला दंतेवाड़ा में रेलवे प्रोटेक्शन सिक्यूरिटी फोर्स) की तैनाती किया जाना प्रस्तावित है।इसी प्रकार राज्य के बस्तर क्षेत्र में वर्ष 2020 में एल.डब्ल्यू.ई योजना के अंतर्गत स्वीकृत 1991 किलोमीटर मार्ग में से शेष मार्गों के निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति में प्रावधानित आयटम में कार्य पुनरीक्षित स्वीकृति अपेक्षित है। बस्तर एवं एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्र में आईटी और संचार ढांचे हेतु टॉवरों की संख्या बढ़ाने एवं 3G/4G  नेटवर्क की सुविधा लोगों पहुंचाने हेतु ओएफसी कनेक्टिविटी की अत्यंत आवश्यकता है। बोधघाट परियोजना के क्रियान्वयन हेतु डीपीआर तैयार करने की कार्यवाही की जा रही है। डीपीआर पूर्ण होने के पश्चात योजना के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक राशि का आकलन किया जा सकेगा। अन्य सिंचाई योजनाओं की स्वीकृति भी अपेक्षित है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि बस्तर क्षेत्र के 214 बसाहटों के लंबित विद्युतीकरण हेतु 63.47 करोड़ रूपए स्वीकृत किया जाना है। इसी प्रकार पंप विद्युतीकरण के 5275 प्रकरण हेतु लगभग रूपए 53 करोड़ स्वीकृत किया जाना प्रस्तावित है। पीएमजीएसवाई-I के अंतर्गत पूर्व में स्टेज-ए में स्वीकृति प्राप्त नक्सल प्रभावित 05 जिलों की 122 सड़को की पूर्णता के पश्चात उक्त सड़कों की स्टेज-B  के प्रस्ताव की स्वीकृति तथा 18 नवीन वृहद पुलों की स्वीकृति भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय में लंबित है, जिसकी स्वीकृति अपेक्षित है। उन्होंने लिखा है कि वर्ष 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत शासन द्वारा स्वीकृत 38 लघु वनोपज की खरीदी हेतु तथा शेष राशि 100 रूपए करोड़ अधोसंरचना विकास (मार्ट एवं जिला यूनियन हेतु गोदाम) एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत पूर्व वर्षों में हानि प्रतिपूर्ति किया जाना प्रस्तावित है।बघेल ने पत्र में लिखा है कि केन्द्रीय रेशम बोर्ड, बैंगलोर को बस्तर संभाग से आईएसडीएसआई के तहत कुल राशि 1032.54 लाख रूपए का कुल प्रस्ताव है, जिसकी स्वीकृति भी अपेक्षित है। इसी तरह मॉ दंतेश्वरी प्रोसिसिंग प्लांट के लिए केन्द्रांश एलोकेशन राशि 72.45 करोड़ रूपए को पुनरीक्षित करते हुए केन्द्रांश एलोकेशन राशि 123.48 करोड़ रूपए किए जाने का अनुरोध भारत सरकार, कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण मंत्रालय में स्वीकृति हेतु लंबित है। मुख्यमंत्री ने बस्तर में वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन हेतु उक्त सभी प्रस्तावों पर केन्द्र सरकार से स्वीकृति देने का अनुरोध करते हुए आशा व्यक्त की है कि केन्द्र सरकार के आवश्यक सहयोग से बस्तर के लोगों के जीवन स्तर में सुधार एवं शांति का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।

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