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सड़क सुरक्षा: मौत का हाइवे बना यमुना एक्सप्रेस-वे,सामाजिक संस्थाओं ने क्रैश बैरियर लगाने के लिए चलाया अभियान 

नई दिल्ली। देश में सड़क हादसों पर लगाम लगाने की दिशा में केंद्र सरकार का मोटर वाहन संशोधन कानून लागू होने के बाद सड़क सुरक्षा के लिए कार्य करने वाली संस्थाएं और सोशलिस्ट सक्रिय हो गये हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे पर पिछले छह साल में पांच हजार से ज्यादा हादसों में 700 से भी ज्यादा लोगों की हुई मौत के कारण ‘मौत का हाइवे’ बने इस एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के मकसद से क्रैश बेरियर लगाने के लिए पिछले कुछ माह से सामाजिक कार्यकर्ता रिंकी शर्मा द्वारा शुरू किये गये पेटीशन को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के ग्रेटर नोएडा से आगरा के सफर को आसान बनाने के मकसद से बनाए गये यमुना एक्सप्रेस-वे लगातार मौत का हाईवे साबित हो रहा है, खासकर ठंड के मौसम में ये हाइवे और भी खतरनाक हो जाता है। मसलन एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 से 2018 के बीच इस हाइवे पर सफर के दौरान अब तक पांच हाजार से ज्यादा सड़क हादसों में 700 मौतों के अलावा 7000 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर कार्य कर रही सोशल एक्टिविस्ट रिंकी शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा राज्य के परिवहन मंत्री, परिवहन विभाग की प्रमुख सचिव और परिवहन आयुक्त को इस दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में यमुना एक्सप्रेसवे को सुरक्षित बनाने के लिए ध्यान आकर्षित करने के मकसद से एक पेटीशन शुरू किया है। यानि इस पेटीशन के ज़रिए वो उत्तर प्रदेश सरकार से मांग कर रही हैं कि यमुना एक्सप्रेसवे को यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाया जाए। दरअसल सैकड़ों जिंदगियां लील चुके इस हाइवे को सुरक्षित बनाने के लिए अब ख़ुद जनता आंदोलन कर रही है, जिसके लिए सामाजिक कार्यकर्ता रिंकी शर्मा के यमुना एक्सप्रेस-वे पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए शुरू किये गये एक अनोखे यानि एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान को अब तक आठ हजार से भी ज्यादा लोगों का समर्थन मिल चुका है और यह समर्थन जारी है। रिंकी ख़ुद इस हाइवे पर सफ़र करती हैं और इस पर होने वाली अनगिनत दुर्घटनाओं की कहानियों की गवाह हैं।

मौत का नहीं, चाहिए जिंदगी का हाईवे

इस पेटीशन के बारे में रिंकी शर्मा ने कहा कि पेटीशन में इस बात पर बल दिया कि यमुना एक्सप्रेस-वे को सुरक्षित बनाने के लिए तुरंत क्रैश बैरियर लगाए जाएं, ताकि सड़क हादसों को रोका जा सके। उनका मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर सडक हादसों के बाद यमुना एक्सप्रेस-वे को ‘मौत का हाईवे’ की संज्ञा देना कोई आश्चर्य नहीं माना जा सकता। यदि सरकार ने यमुना एक्सप्रेसवे को सुरक्षित करने के लिए जल्द ही कोई कदम नहीं उठाए तो आज नहीं तो कल हम या कोई भी अथवा किसी के अपने इस ‘मौत के हाईवे’ के शिकार हो सकते हैं। विभिन्न मंचों से सड़क सुरक्षा को लेकर आवाज बुलंद करती आ रही रिंकी शर्मा ने इस दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार के नाम शुरू की गई पेटीशन इस एक्सप्रेस-वे पर हादसों को रोकने के लिए ठोस एवं सुरक्षित कदम उठाने पर बल दिया है। रिंकी शर्मा की इस पेटीशन सलोगन दिया गया है कि हमें ‘मौत का हाईवे’ नहीं ‘ज़िंदगी का हाईवे’ चाहिए। रिंकी शर्मा का यह भी कहना है कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर होने वाले हादसों की रोकथाम के लिए सड़क सुरक्षा निगरानी समिति ने आईआईटी दिल्ली से सुरक्षा ऑडिट कराने के आदेश दिए थे। आईआईटी दिल्ली की टीम ने एक्सप्रेस-वे का सुरक्षा ऑडिट कर यमुना प्राधिकरण को कई माह पहले ही रिपोर्ट सौंप दी है परन्तु सुझावों को लागू कराने की रफ्तार काफी धीमी है, जबकि एक्सप्रेस-वे पर हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान(सीआरआरआई) ने भी सरकार को सुझाव दिया है कि अभी यमुना एक्सप्रेस वे पर लगे कंटीली तार बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर कंटीली तार के बजाए क्रैश बैरियर लगाए जाएं, ताकि हादसों में कोई वाहन सड़क के दूसरी तरफ न जा सके। क्योंकि क्रैश बैरियर लग जाने के बाद ही यात्री बसों के हादसों पर लगाम लगाई जा सकेगी। रिंकी शर्मा ने कहा कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर क्रैश बैरियर लगाने की उनकी मुहिम जारी रहेगी और वह इसको अंजाम तक पहुंचाकर रहेगी।

ऐसे रोके जा सकेंगे हादसे

देश में सड़क सुरक्षा के लिए कार्य करने वाली कंज्यूमर वॉयस की प्रोजेक्ट मैनेजर एकता पुरोहित का कहना है कि ने कहा कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर हादसों को रोकने के लिए क्रैश बैरियर लगाने जैसे सुरक्षित उपाय किये जाने बेहद जरुरी हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ भी लगतार यमुना एक्सप्रेस वे पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए सरकार को लगातार सुझाव देते आ रहे हैं। वैसे भी भारत में सड़क हादसों से संबंधित मौतें और लोगों का घायल होना हमारे देश के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई। एकता पुरोहित का कहना है कि अब देश में मोटर वाहन संशोधन कानून भी लागू हो गया है, जिसके साथ खासकर देश के एक्सप्रेसवे और हाइवे को सुरक्षित करने के उपाय करने के लिए तेजी से आगे आने की जरूरत है। भारत में सड़क हादसों में होने वाली मौतें सड़क हादसों में होने वाली वैश्विक मौतों के 10 फीसदी हिस्से से ज्यादा हैं।

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