Press "Enter" to skip to content

लोकतंत्र की यात्रा में मील का पत्थर बना आरटीआई कानून: शाह

Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा सूचनाओं को सक्रियता से सार्वजनिक पटल पर रखना है ताकि आरटीआई आवेदन दायर करने की जरूरत को घटाया जा सके।

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 14वें वार्षिक सम्मेलन में यहां शनिवार का गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आरटीआई आवेदनों की संख्या अधिक होने में किसी सरकार की सफलता नहीं होती है। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित शाह ने कहा कि आरटीआई आवेदन दायर करने के सहज तरीके उपलब्ध होने के बावजूद उनकी संख्या कम होने का अर्थ है कि सरकार का काम संतोषजनक है। आरटीआई आवेदन ज्यादा होना सरकार की सफलता को नहीं दर्शाता। हम एक ऐसा तंत्र लाना चाहते हैं जहां लोगों को सूचना पाने के लिए आरटीआई आवेदन दाखिल करने की जरूरत न महसूस हो। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाई गई डैशबोर्ड प्रणाली ने सुनिश्चित किया कि हर किसी को बिना आरटीआई आवेदन दायर किए देश में जारी योजनाओं की ऑनलाइन जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि डैशबोर्ड के प्रयोग के जरिए, हमने एक नये पारदर्शी युग की शुरुआत की। एक व्यक्ति डैशबोर्ड पर जाकर देख सकता है कि कितने शौचालय बनाए गए। डैशबोर्ड का प्रयोग कर लोग जान सकते हैं कि सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन कब मिलेगा। एक निरक्षर महिला डैशबोर्ड पर क्लिक कर जान सकती है कि उसे गैस सिलेंडर कब मिलेगा। आरटीआई होना चाहिए इस बात पर जोर देते हुए शाह ने कहा कि सरकार पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कानून से दो कदम आगे बढ़ गई है। उन्होंने कहा कहा कि सरकार ने प्रशासन का काम इतना पारदर्शी बना दिया है कि आरटीआई आवेदन दायर करने की बहुत कम जरूरत है। यह प्रणाली इस तरह से काम करेगी कि हमें आरटीआई आवेदनों को दाखिल करने की जरूरत न हो।

गृहमंत्री ने कहा कि मेरा सीआईसी से एक अनुरोध है कि आप न सिर्फ आरटीआई आवेदनों का निपटान करें बल्कि लोगों को उन कदमों से भी अवगत कराएं जो सुनिश्चित करते हैं कि हमें आरटीआई आवेदन दायर करने की जरूरत नहीं है। शाह ने कहा कि कानून बनाने की पीछे की मंशा को पूरा करने में देश पिछले 14 साल से सफल रहा है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून बनाने के बीच मूल विचार व्यवस्था में लोगों का विश्वास बढ़ाना था। उन्होंने कहा कि व्यवस्था संविधान के चार कोणों पर चलती है। कानून का मुख्य उद्देश्य लोगों में विश्वास पैदा करना है कि व्यवस्था संविधान के अनुसार चल रही है। संविधान और व्यवस्था में जब यह विश्वास जागृत रहता है, तो लोगों की सहभागिता अपने आप बढ़ जाती है जो देश को आगे ले जाती है। लेकिन जब अविश्वास होता है तो लोगों की सहभागिता मंद पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में आवश्यक है कि शासन एवं व्यवस्था में लोगों का विश्वास एवं सहभागिता मजबूत हो।

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.
More from खबरMore posts in खबर »
More from देश प्रदेशMore posts in देश प्रदेश »
More from राजनीतिMore posts in राजनीति »

Be First to Comment

    प्रातिक्रिया दे

    आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

    Mission News Theme by Compete Themes.