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स्नेहा वाघ ने देवी की अपनी भूमिका के लिये किया योगा का कठिन अभ्यास

मुम्बई। किसी भी एक्टर के लिये एक्टिंग केवल कुछ लाइनें याद कर लेना और कैमरे के सामने उस समय पूरी वास्तविकता के साथ उन्हें दोहराना भर नहीं होता। किरदार में ढलने के लिये एक्टर्स को अक्सर कई तरह की एक्टिविटीज करनी होती है ताकि सही रूप में उसे प्रस्तुत कर सकें। हर कलाकार का किसी भूमिका की तैयारी करने का अपना तरीका होता है और उन्हीं में से एक हैं टेलीविजन का जाना-माना चेहरा, स्नेहा वाघ, जिन्होंने पहले भी कई चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभायी हैं और अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है। स्नेहा वाघ -&tv के ‘कहत हनुमान जय श्रीराम’ में देवी अंजना की भूमिका निभाती नज़र आयेंगी। देवी अंजना का जन्म धरती पर वानरों की रानी के रूप में हुआ था और उनकी शादी भगवान केसरी से हुई थी। हवा के देवता वायु ने भगवान शिव की दैविक शक्तियां अंजना के गर्भ में डाल दीं और फिर शिव के रूप में हनुमान का जन्म हुआ। इस देवी अवतार में प्रवेश कर रहीं, वाघ इस किरदार को बखूबी निभाने के राज का खुलासा करती हैं। इस शो की शूटिंग शुरू होने से पहले इस भूमिका को करने के लिये वह पिछले दो महीनों से योगा क्लासेस जा रही हैं।

योगा केवल शरीर को शांत करने का एक सरल रूप नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के लिये भी है और एक कठिन योगा, कठिन योगा सेशन की एक पूरी प्रक्रिया होती है, जोकि मांसपेशियों को मजबूती देने में मदद करता है और लचीलापन तथा फोकस बढ़ाता है। अपने किरदार की तैयारियों के लिये किस तरह की दिनचर्या का पालन कर रही हैं इस बारे में बताते हुए, स्नेहा कहती हैं, ‘‘मैंने पारंपरिक, आधुनिक और ऐतिहासिक सभी तरह की भूमिकाएं निभायी हैं, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि पौराणिक भूमिकाएं निभाना बहुत ही मुश्किल होता है। इसके कई सारे कारण माने जा सकते हैं, मुझे ऐसा लगता है कि इस किरदार से आध्यात्मिक रूप से जुड़ना सबसे प्रमुख हेता है। किसी भी देवी के किरदार में ढलने के दौरान सबसे पहली बात जो दिमाग में आती है वह है उनका सटीक देवी रूप और कोई भी उस रूप को बनाये रखने में गलती नहीं कर सकता। मैंने योगा के कठिन अभ्यास के फायदों के बारे में काफी पढ़ा और मुझे ऐसा लगा कि इससे मुझे महाबली हनुमान की मां की भूमिका निभाने में काफी मदद मिलेगी! साथ ही मुझे ऐसा लगता है कि योगा कई सारी ऐसी परेशानियों को दूर कर सकता है, जो जिम में वर्क आउट करने से नहीं हो सकता। एक के बाद एक शूटिंग, सफर और रात-दिन काम करने की वजह से समय की कमी के बावजूद मैंने कभी भी अपना वर्कआउट मिस नहीं किया। आपको एक खास उम्र तक अपने शरीर का ध्यान रखना पड़ता है। इसके बाद शरीर आपका खुद ध्यान रखता है। इस तरह के कठिन योगा सेशन से ना केवल आपको आत्मविश्वास मिलता है, बल्कि आपकी सुंदरता में भी चार-चांद लग जाता है।’’

‘कहत हनुमान….जय श्रीराम’ ‘भक्त’ और ‘भक्ति’ की एक दिलचस्प कहानी है। ‘भक्ति’ के प्रतीक माने जाने वाले, शक्तिशाली तथा सर्वोच्च देवता भगवान शिव के अवतार, हनुमान को धरती पर सबसे ताकतवर एक खास उद्देश्य तथा क्षमताओं के लिये तैयार किया गया था। यह शो सबसे महान देवताओं में से एक के बारे में नये तरह की प्रस्तुति लेकर आ रहा है। यह भगवान हनुमान के कई अनछुए पहलुओं को सामने लेकर आयेगा, इस दौरान प्रासंगिक, आज के दौर के अनुसार संदेश भी देगा। इससे दर्शकों के चेहरे पर एक बड़ी-सी मुस्कान आ जायेगी।

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