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ऐसे होती है कार्यवाही, शिकायत प्राप्त होते ही लेखपाल हुआ निलम्बित

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मुजफ्फरनगर- जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय ने बताया कि 25 अप्रैल को जनसुनवाई के दौरान श्रीमती अनुराधा पत्नी स्व0 श्री सुमित निवासी ढांसरी तहसील जानसठ द्वारा शिकायत की गई कि उसके पति सुमित की मृत्यु 02 अगस्त 2017 को हो गई थी, लेकिन लेखपाल द्वारा अभी तक वारिसों के नाम खतौनी में दर्ज नहीं कराये गये हैं। प्रकरण की गम्भीरता को देखते हुए जिलाधिकारी द्वारा एस0डी0एम0 जानसठ को तत्काल प्रकरण की जांच कर कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये। जांच के दौरान पाया गया कि लेखपाल द्वारा वर्ष 2017 से आज तक मृतक के वारिसान खतौनी में दर्ज नहीं किये गये।  क्षेत्रीय लेखपाल अमरदीप द्वारा बरती गई घोर लापरवाही के दृष्टिगत उसे दोषी मानते हुए तत्काल निलम्बित किया गया तथा मृतक के वारिसान खतौनी में दर्ज कराकर श्रीमती अनुराधा को खतौनी की प्रति भी हस्तगत करा दी गई। 

ज्ञातव्य है कि जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय द्वारा विरासत के मामलों में स्वयमेव तत्काल वारिसान दर्ज किये जाने के लिए ‘कृषक परिक्रमा मुक्ति  अभियान’ चला रखा है। एस0डी0एम0/तहसीलदार को निर्देश दिये गये हैं कि चूंकि यह विरासत जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत प्राप्त होने पर दर्ज की गई है, जो एस0डी0एम0/तहसीलदार के द्वारा सत्यापन कर पूर्व ही दर्ज करा देनी चाहिये थी। जिलाधिकारी द्वारा सभी एस0डी0एम0/तहसीलदार को पुनः निर्देश दिये गये हैं कि ऐसे सभी मामलों का शत-प्रतिशत सत्यापन करा लें। यदि भविष्य में इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो सम्बन्धित लेखपाल के साथ-साथ तहसीलदार के विरूद्ध भी कार्यवाही की जायेगी। 

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