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अदालत के फर्जी दस्तावेज बनाकर फायदा उठाना गंभीर अपराध: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। धोखाधड़ी के मामले में हाई कोर्ट द्वारा एक व्यक्ति को दी गई जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि फर्जी अदालती दस्तावेज तैयार करना या उससे छेड़छाड़ करके लाभ उठाना गंभीर अपराध है। जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ और जस्टिस एम. आर. शाह की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए कहा कि आरोपी को जमानत पर छोड़ने का उसका आदेश अस्वीकार्य है और वह रद्द किए जाने योग्य है। पीठ ने कहा कि फर्जी अदालती दस्तावेज बनाना या उनसे छेड़छाड़ करना और उससे लाभ लेना बहुत गंभीर अपराध है। अगर अदालती दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किये गए या उनमें छेड़छाड़ की गई तो इससे न्याय बाधित होगा। पीठ ने कहा कि फर्जी अदालती दस्तावेज तैयार करके या उससे छेड़छाड़ करके फायदा उठाने और दो लोगों के बीच फर्जी दस्तावेजों के मामले में आसमान जमीन का अंतर है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कथित रूप से अदालती रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने वाले व्यक्ति को जमानत देते हुए हाई कोर्ट को ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

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