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टीटी की जगह अब लगाया जा रहा टीडी का टीका, टिटनेस के साथ डिप्थीरिया से भी बचाएगा

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मुजफ्फरनगर। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर रोगों से बचाने से लिए अब टीटी टिटटनेस के स्थान पर टीडी (टिटनेस डिफ्थीरिया) का टीका लगाया जाएगा। जिसकी शासन और जिले स्तर पर ट्रेनिंग भी शुरू हो चुकी है। दरअसल बच्चों में होने वाले टटेली रोग, जिसमें नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी होने पर पूरा शरीर अकड़ जाता है। इस रोग का उपचार बेहद मुश्किल होता है। बच्चों को इस रोग से बचाने के लिये गर्भवती महिलाओं और 10 से16 साल तक के सभी बच्चों को टीटी का टीका लगाया जाता था, जिसको अब टीडी (टिटनेस डिफ्थीरिया) में शामिल कर लिया गया है। 

जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्साधिकारी ने जानकारी देते हे बताया कि 2018 में यूपी के कई हिस्सों में डिप्थीरिया ने कई बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसके कारण इस बीमारी से बचने के लिए शासन स्तर पर प्रभावी रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाया गया है। 

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. शरण सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला अस्पताल में अब तक 1454 गर्भवती महिलाओं को टीडी डिप्थीरीया का टीका लग चुका है। जिनमें ग्रामीण और शहरी हर जगह की महिलाएं शामिल है। इस टीके को बच्चे तक 3 डोज में पहुंचाया जाएगा। टीडी का पहला टीका गर्भवती महिला को लगेगा। इसके बाद बच्चे के जन्म के 3 महीने बाद उसको एक डोज दी जाएगी। इसके बाद 10 वर्ष की आयु में तीसरी डोज दी जाएगी। यह टीका 16 साल तक के बच्चे को लगाया जा सकता है। यदि किसी को पहले टीटी का टीका लगा हुआ है तो वह भी टीडी का टीका लगवा सकता है। ये टीका बुधवार और शनिवार को एएनएम के माध्यम से लगाया जाएगा। 

दरअसल, डिफ्थीरिया को गलघोंटू नाम से भी जाना जाता है। जिससे बैक्टीरिया टांसिल व श्वास नली में संक्रमण पैदा हो जाता है। और सांस लेने में रुकावट पैदा होती है। यह बीमारी बड़े लोगों की तुलना में बच्चों को अधिक होती है। इस बीमारी के होने पर गला सूखने लगता है।

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