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भाजपा के ‘शत्रु’ कांग्रेस के ‘मित्र’ हुए, कहा भारी मन से छोड़ी पार्टी, वहां तानाशाही हावी

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नई दिल्ली। बॉलीवुड के शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा ने आखिरकार शनिवार को भारी मन से भाजपा को अलविदा कह दिया। एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान करते हुए कहा कि भाजपा अब वन मैन शो, टू मैन आर्मी हो चुकी है। वहां लोकशाही की जगह तानाशाही हावी हो चुकी है। ऐसे में बड़े भारी मन से पार्टी छोड़ने का फैसला लेना पड़ा।

शत्रुघ्न सिन्हा वैसे तो केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के कुछ महीने बाद से ही पार्टी की रीति-नीति में हो रहे बदलाव को लेकर तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। खासकर जब पार्टी ने वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी को हाशिए पर फेंका और शत्रुघ्न सिन्हा को भी कहीं कोई अहमियत नहीं मिली, तब से वे पार्टी हाईकमान को लेकर कुछ न कुछ बातें कहने लगे थे। नोटबंदी और जीएसटी के बाद तो वे खुल कर अलग-अलग मंचों पर मोदी और अमित शाह पर हमला करने लगे थे। हाल के दिनों में उन्होंने यह भी इशारा करना शुरू कर दिया था कि पार्टी को वे नहीं छोड़ेंगे, पार्टी भले ही उन्हें निकाल दे। पिछले दिनों जब सिन्हा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के मंच पर दिखे, उसके बाद यह तय मान लिया गया था कि पार्टी उनके खिलाफ ऐक्शन लेगी। परंतु, भाजपा ने ऐसा कुछ नहीं किया। लोकसभा टिकट बंटने शुरू हुए तो सिन्हा की संसदीय सीट पटना साहब से उनकी जगह रविशंकर प्रसाद को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसे एक तरह से पार्टी का सिन्हा को इशारा माना गया कि भाजपा को अब उनकी जरूरत नहीं है। बस, यहीं से शत्रुघ्न सिन्हा ने भी पार्टी बदलने का संकेत देना शुरू कर दिया। पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की और उसी दिन बता दिया कि नवरात्र में वे कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे।

शत्रुघ्न सिन्हा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से काफी प्रभावित रहे हैं। वे अपने कई साक्षात्कार में भी कह चुके हैं कि अगर श्रीमती इंदिरा गांधी जीवित होतीं तो वे कांग्रेस में ही होते। तब न सही, सिन्हा अब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के हो गए। माना जा रहा है कि कांग्रेस उन्हें बिहार की पटना साहब सीट से अपना प्रत्याशी बनाएगी। बिहार में कांग्रेस का राजद के साथ गठबंधन है, इसलिए सिन्हा का पलड़ा काफी भारी दिख रहा है। यह उनकी पुरानी सीट है। दूसरी बार वे इस सीट से सांसद हैं। लिहाजा कांग्रेस-राजद गठबंधन में उनकी स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। सिन्हा ने कांग्रेस ज्वाइनिंग का श्रेय राजद नेता लालू यादव को दिया। लालू का आभार जताते हुए कहा कि वे उनके पारिवारिक मित्र हैं और उनके परामर्श पर ही उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा है।

कांग्रेस में शामिल होने के दौरान सिन्हा ने भाजपा में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और उपेक्षा का जिक्र करते हुए मोदी-शाह की जोड़ी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा में लोकशाही की जगह तानाशाही आ चुकी है। वहां अब सामूहिक फैसले की परंपरा खत्म हो चुकी है। अलबत्ता अगर कोई सही सलाह दे रहा है तो उसे भी गलत ढंग से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता रहे जो विरोधी का भी पूरा सम्मान करते थे। संसद में तब की पीएम इंदिरा गांधी की तारीफ करने और उन्हें दुर्गा बताने वाले वाजपेयी की परंपरा वाली भाजपा अब नहीं है। यहां सच बोलने को बगावत माना जाने लगा है और मैंने हमेशा सच का साथ दिया। अगर सच बोलना बगावत है तो हां, मैं भी बागी हूं।

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