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कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना, सोमवार को बाबा बर्फानी का पहला दर्शन

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जम्मू। आतंकी हमलों की धमकी के चलते कड़ी सुरक्षा के बीच बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए यात्रियों का पहला जत्था रविवार को रवाना हो गया। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार के.के. शर्मा ने भगवती नगर स्थित बेस कैंप से पहले जत्थे को हरी झंडी दिखा कर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को रवाना किया।
बम बम भोले, जय बर्फानी बाबा के जयकारे लगाते हुए अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं का पहला जत्था रविवार की सुबह पहलगाम और बालटाल के लिए रवाना हुआ। बाबा अमरनाथ की यात्रा एक जुलाई से शुरू हो रही है, जो 46 दिनों तक
चल कर रक्षा बंधन के दिन 15 अगस्त को समाप्त होगी। बालटाल मार्ग से पहुंचने वाले श्रद्धालु एक जुलाई सोमवार को पहले दर्शन करेंगे। बाबा बर्फानी पवित्र गुफा में इस समय पूरे आकार में विराजमान हैं। जत्थे के
साथ सीआरपीएफ और पुलिस की सुरक्षा टीमें भी रवाना हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस भी यात्रा के साथ गई है। आतंकी हमलों की आशंका के बावजूद बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए जा रहे यात्रियों में भारी उत्साह
है। जत्था रवाना करने के वक्त बेस कैंप में उत्सवी माहौल रहा। रविवार को रवाना होने जत्थे को बाबा बर्फानी का पहला दर्शन सोमवार को होगा। अमरनाथ यात्रा देश की सबसे लंबे समय तक चलने वाली यात्रा मानी जाती
है। यह सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में शामिल है। मौसम और यात्रा मार्ग की भौगोलिक परिस्थियों के साथ ही इस यात्रा में आतंकी हमले की आशंका हर क्षण बनी रहती है। इसके चलते इस यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे अहम और चुनौतीपूर्ण होती है। पूर्व में नुनवन, पहलगाम और शेषनाग मे यात्रियों पर हमले हो चुके हैं। यहां तक कि श्रद्धालुओं के वाहनों को बालटाल, कंगन, गांदरबल, अनंतनाग और बिजबेहाड़ा में ग्रेनेड हमले का निशाना बनाया जा चुका है। 10 जुलाई 2017 को लश्कर आतंकियों ने दर्शन करलौट रहे श्रद्धालुओं की बस को दक्षिण कश्मीर में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय
राजमार्ग पर निशाना बनाया था। इसमें आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। समुद्र तल से करीब 38 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ की गुफा और यात्रा मार्ग पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए
हेलीकॉप्टर भी लगाए गए हैं, जिसके जरिए सुरक्षा एजेंसियां हर वक्त यात्रा मार्ग पर नजर रख रही हैं। साथ ही पूरे यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। आरआईएफ टैग और बार कोड श्रद्धालुओं और उनके वाहनों की
निगरानी में लगे हैं। वहीं ड्रोन और खोजी कुत्तों के साथ आधुनिक हथियारों से लैस करीब 40 हजार सुरक्षाकर्मी भी यात्रियों की रखवाली के लिए लगाए गए
हैं।

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