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17वीं लोकसभा का पहला सत्र सोमवार से शुरू, दस अध्यादेशों को कानून में बदलवाना सरकार की चुनौती

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नई दिल्ली। सत्रहवीं लोकसभा के पहले संसद सत्र में मोदी-2 सरकार द्वारा एजेंडे में दस अध्यादेशों को विधेयकों में बदलवाना आसान नहीं होगा। मसलन राज्यसभा में सरकार अल्पमत में है और लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी इन विधायी कार्यो पर मुहर लगना जरूरी है। वहीं 40 से ज्यादा ऐसे विधेयक जो लेप्स हो चुके हैं उनमें से कुछ महत्वपूर्ण बिलों को भी सरकार कल सोमवार से आरंभ हो रहे संसद सत्र में पेश करेगी।

मोदी की नई सरकार के पहले संसद सत्र में 16वीं लोकसभा का सत्रवाहसन होते ही लेप्स हुए 46 विधेयकों को नए सिरे से पेश करने की योजना भी चुनौती साबित होगी, क्योंकि राज्यसभा में सत्तापक्ष का बहुमत नहीं है। जहां तक सरकार द्वारा इस सत्र में दस अध्यादेशों मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक के अलवा कंपनी (संशोधन) अध्यादेश, आधार और अन्य कानून (संशोधन) अध्यादेश, भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) अध्यादेश, नयी दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र अध्यादेश, होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) अध्यादेश और केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (शिक्षक संवर्ग में आरक्षण)अध्यादेश तथा जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) अध्यादेश को कानून में बदलने का सवाल है यह भी इतना आसान नहीं है।

संसद का एजेंडा
संसद सत्र के 17 जून से 19 जून यानि पहले तीन दिन लोकसभा में नवनिर्वाचित सांसदों द्वारा शपथ ग्रहण की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद 20 जून से राष्ट्रपति अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरूआत होगी। सत्र के दौरान लोकसभा में पांच जुलाई को 11 बजे केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट 2019-20 पेश करेंगी। इससे पहले चार जुलाई को संसद में भारत का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा। वहीं 16वीं लोकसभा में अस्तित्व खो चुके 46 विधेयकों में से कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को फिर से संसद के पटल पर रखेगी। संसद यह यह सत्र सत्र कल 17 जून तथा राज्यसभा का 249वां सत्र 20 जून से आरंभ होगा। संसद का यह सत्र 26 जुलाई तक चलेगा। 20 जुलाई को केंद्रीय कक्ष में संयुक्त सदन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अभिभाषण होगा। संसद सत्र के लिए सरकार के एजेंडे के अनुसार इस दौरान लोकसभा में 30 और राज्यसभा में 27 बैठकें होंगी। संसद सत्र में मुख्य रूप से लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण, लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव, केन्द्रीय बजट 2019-20 से संबंधित वित्तीय कामकाज के अलावा आवश्यक विधायी और गैर-विधायी कार्यों शामिल है। इस दौरान भारतीय संविधान की धारा 356 के अर्न्तगत राष्ट्रपति द्वारा जम्मू व कश्मीर के संबंध में 19 दिसंबर 2018 को जारी रखने के लिए उद्घोषणा के विस्तार 2019 तक मंजूर किया जाना आवश्यक है।

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