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सरकार ने फिर की वार्ता की पेशकश, किसानों ने कहा चर्चा करके जवाब देंगे

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक बार फिर आंदोलनरत किसानों से वार्ता की पेशकश की है। रविवार देर शाम केंद्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने किसान यूनियनों को भेजी एक चिट्ठी में कहा कि वे अगले दौर की वार्ता की तारीख बताएं, ताकि कानूनों में संशोधन के प्रस्तावों पर चर्चा की जा सके।

दूसरी ओर किसानों ने सोमवार को कहा कि सरकार की ओर से आई चिट्ठी पर किसानों ने कहा कि इसमें नया कुछ भी नहीं है। सरकार अगर ठोस समाधान पेश करती है तो किसान बातचीत को तैयार हैं। किसानों ने कहा कि सभी यूनियन्स आपस में चर्चा कर रहे हैं कि केंद्र की चिट्ठी का किस तरह से जवाब दिया जाए। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने वार्ता में शामिल 40 किसान संगठनों के नेताओं को रविवार को चिट्ठी लिखकर कानून में संशोधन के पूर्व के प्रस्ताव पर अपनी आशंकाओं के बारे में उन्हें बताने और अगले चरण की वार्ता के लिए सुविधाजनक तारीख तय करने को कहा है ताकि जल्द से जल्द आंदोलन खत्म हो।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वह नए कृषि कानूनों में संशोधन के पूर्व के प्रस्ताव पर बात करना चाहती है। इस मुद्दे पर हमने उनके साथ पहले बातचीत नहीं की थी। फिलहाल हम आपस में चर्चा कर रहे हैं कि सरकार के पत्र का किस तरह जवाब दिया जाए। किसान नेता अभिमन्यु कोहार ने कहा कि नए कृषि कानूनों को संशोधित करने का सरकार का प्रस्ताव हम पहले ही खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि क्या उन्हें हमारी मांगें पता नहीं हैं। दोआबा किसान समिति के महासचिव अमरजीत सिंह रर्रा ने कहा कि किसान सरकार के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हें ठोस समाधान के साथ आना होगा। क्रांतिकारी किसान यूनियन के गुरमीत सिंह ने कहा कि मंगलवार को संयुक्त मोर्चा की बैठक होगी और फैसला किया जाएगा कि सरकार को क्या जवाब देना चाहिए।

मालूम हो कि दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान कड़ाके की सर्दी में पिछले लगभग चार सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर किसान पंजाब और हरियाणा से हैं। सरकार और आंदोलनरत किसानों के बीच अब तक पांच दौर की वार्ता हो चुकी है, जो बेनतीजा रही। सरकार की ओर से लिखित मसौदा प्रस्ताव भेजे जाने के बाद किसान यूनियनों ने नए कृषि कानूनों में संशोधन तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रखने का लिखित आश्वासन देने के केंद्र के प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है। इसके चलते नौ दिसम्बर को प्रस्तावित छठे दौर की वार्ता स्थगित कर दी। तब से ठहराव की स्थिति बनी हुई है।

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