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स्वास्थ्य विभाग ने छपरौला के कई घरों में लार्वा मिलने पर तत्काल फागिंग करवाई

नोएडा। जनपद का स्वास्थ्य विभाग 24 घंटे सेवायें देने के लिए तत्पर है। इसी क्रम में छपरौला के कई घरों में लार्वा मिलने पर तत्काल फागिंग करवाई। मलेरिया अधिकारी ने कहा कि जब तक आमजन मच्छर और मच्छर जनित बीमारियों के प्रति जागरूक नहीं होगा तब तक इन पर अंकुश पाना मुश्किल होगा। घरों में प्रयोग हो रहे कूलरों और पानी की टंकियों में मच्छरों के लार्वा मिलने का मतलब स्पष्ट है कि विभाग द्वारा की गयी अपील का असर लोगों पर नहीं हो रहा है वह अपने घरों में ही लार्वा पाल रहे हैं। उन्होंने बताया, पिछले दिनों जिस क्षेत्र में डेंगू के लार्वा मिले थे वहां विभाग द्वारा निरोधात्मक कार्रवाई की गयी है।

जिला मलेरिया अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया, पिछले दिनों गाजियाबाद से डेंगू के 3 रोगी अधिसूचित किये गये थे, जो गौतमबुद्ध नगर के ग्राम छपरौला ब्लाक बिसरख के निवासी हैं। जिला मलेरिया विभाग की रेपिट रिसपांस टीम ने गांव का दौरा कर निरोधात्मक कार्रवाई की और क्षेत्र का सर्वेक्षण भी किया। सर्वेक्षण में पता चला की डेंगू से ग्रसित लोगों के घर में कूलरों और पानी की टंकी में डेंगू के लार्वा पले हुए थे। उन्होंने बताया, तीन घऱों के अलावा क्षेत्र के 72 घरों और 82 पात्रों की चेकिंग की गयी, जिसमें 4 पात्रों में लार्वा मिला।

मलेरिया अधिकारी का कहना है कि वहां लार्वा मिलने से स्पष्ट है कि रोग का प्रसार घर से ही हुआ। उन्होंने बताया, जिन पात्रों में लार्वा मिला वह सभी खाली कराए गये और आसपास के 25 घरों के अंदर फाँगिंग तथा 47 घरों में स्पेशल स्प्रे करवाया गया।  इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बिसरख की टीम ने गांव में शिविर लगाकर 138 रोगिंयों का उपचार किया और बुखार के 18 रोगियों के खून के नमूने जांच के लिए जिला अस्पताल स्थित लैब भेजें हैं। गांव में बीमारियों से बचाव-उपाय के पोस्टर लगवाए गये हैं।

जिला मलेरिया अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि डेंगू व मलेरिया का संचरण काल चल रहा है, इस लिए जरूरी है कि घरों में अनावश्यक रखें पात्रों में साफ पानी इकट्ठा न होने दें। कूलर की टंकी सप्ताह में एक बार खाली कर सुखाने के बाद प्रयोग करें। बुखार आने पर तत्काल खून की जांच कराएं। जांच और उपचार सरकारी अस्पताल में निशुल्क होता है। बिना चिकित्सक की सलाह के अपने आप मेडिकल स्टोर से दवा खरीद कर न खायें।

मलेरिया विभाग की चेकिंग टीम का कहना है कि उन्हें सर्वे और जांच के समय सबसे ज्यादा दिक्कत घरों में आती है। वह जब भी घरों में चेकिंग के लिए जाते हैं तो पहले तो उन्हें घर में ही नहीं घुसने दिया जाता है, किसी तरह समझा कर घर में चले भी जाते हैं तो वह यह मानने को तैयार नहीं होते हैं कि कूलर या पानी की टंकी में मच्छरों का लार्वा है। टीम के सदस्यों का कहना है कि छपरौला के गांव में घर के लोग जिस कूलर और पानी की टंकी को साफ समझ रहे थे उन्हीं में बड़ी संख्या में लार्वा मिला।

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