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फिर बेनतीजा खत्म हुई किसानों-सरकार की बैठक, 8 जनवरी को फिर होगी बातचीत, गतिरोध बरकरार

नई दिल्ली। दिल्ली में कड़ाके की ठंड के बीच पिछले सवा महीने से कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। बारिश और ठंड के बीच दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों की सोमवार को एक महीने से ज्यादा समय से चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए किसान संगठनों और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच बातचीत भी बेनतीजा साबित हुई। सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जा सकता है। जबकि किसान कानूनों को रद्द किए जाने की मांग पर कायम हैं। अब अगली बैठक 8 जनवरी को होगी। सोमवार को भी नए कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध अभी खत्म नहीं हुआ है। सोमवार को यहां विज्ञान भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और सोम प्रकाश ने विभिन्न किसान संगठनों के 41 नेताओं के साथ बातचीत का दौर चला। मसलन यहां विज्ञान भवन में सोमवार को हुई आठवें दौर की बैठक भी बेनतीजा साबित हुई। अब एक बार फिर से आठ जनवरी को बैठक होगी। दरअसल किसानों की नए कानूनों की मांग को केद्र सरकार ने यह कहकर खारिज कर दिया कि इन्हें रद्द नहीं किया जा सकता। सरकार ने कानूनों में संशोधन के लिए समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया हुआ है, जिसे किसानों ने एक सिरे से खारिज करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर रखी और चेतावनी दी कि जब तक कानूनों को वापस नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। मलसन किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कानूनों की वापसी के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि कई मुद्दों पर चर्चा होनी है। सरकार को समझना चाहिए कि किसानों ने इस आंदोलन को अपने दिल से लगा लिया है और कानूनों को निरस्त करने से कम पर वे कुछ नहीं मानेंगे। स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू करना चाहिए और एमएसपी पर कानून बनाना चाहिए। सरकार और किसानों की वार्ता में केंद्र के कई मंत्रियों के अलावा किसानों की और से 40 किसान संगठनों के प्रतिनधि शामिल हुए।

एमएसपी समेत अन्य मुद्दों पर हुई बात-दोनों पक्षों ने एक घंटे की बातचीत के बाद भोजनावकाश लिया। सरकार इन कानूनों को निरस्त नहीं करने के रुख पर कायम है और समझा जाता है कि उसने इस विषय को विचार के लिए समिति को सौंपने का सुझाव दिया है। दोनों पक्षों के बीच एक घंटे की बातचीत में अनाज की खरीद से जुड़ी न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रणाली को कानून मान्यता देने के किसानों की महत्वपूर्ण मांग पर चर्चा नहीं हुई है। किसान संगठन के प्रतिनिधि अपने लिए खुद भोजन लेकर आए थे जो लंगर के रूप में था। हालांकि 30 दिसंबर की तरह आज केंद्रीय नेता लंगर के भोजन में शामिल नहीं हुए और भोजनावकाश के दौरान अलग से चर्चा करते रहे।

सरकार को किसानों की चेतावनी-किसानों और सरकार के बीच में अब तक 6 दौर की बातचीत हो चुकी है। आज की बात हल निकालने की कड़ी में अहम साबित हो सकती है। किसानों की दो मुख्य मांगें- तीन नए कृषि कानूनों को खत्म करना और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी बनाने की मांग जैसे की तैसी बनी हुई हैं। किसान इन मांगों पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो वो 26 जनवरी को मनाने के लिए हजारों किसान अपने ट्रैक्ट्ररों के साथ परेड के लिए राजधानी में आगे बढ़ेंगे।

काफी दबाव में सरकार-सातवें दौर की बातचीत के बाद किसान नेता ने दावा किया कि सरकार काफी दबाव में है। ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने बताया कि सरकार दबाव में है। हम सभी ने कहा कि हमारी कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग है। हम किसी अन्य विषय पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं। जब तक कानून वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन वापस नहीं होगा।

दिल्ली की सीमाओं पर जारी है प्रदर्शन-पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हजारों की संख्या में किसान कृषि संबंधी तीन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पिछले एक महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास प्रदर्शन स्थल पर भारी बारिश और जलजमाव एवं जबर्दस्त ठंड के बावजूद किसान डटे हुए हैं। गौरतलब है कि ये कानून सितबर 2020 में लागू हुए और सरकार ने इसे महत्वपूर्ण कृषि सुधार के रूप में पेश किया और किसानों की आमदनी बढ़ाने वाला बताया। बैठक के दौरान सरकार ने तीनों कृषि कानूनों के फायदे गिनाये जबकि किसान संगठन इन कानूनों को वापस लेने पर जोर देते रहे ताकि नए कानून के बारे में उन आशंकाओं को दूर किया जा सके कि इससे एमएसपी और मंडी प्रणाली कमजोर होगा और वे बड़े कारपोरेट घरानों की दया पर होंगे।

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