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चीनी फौज के साथ हुई झड़प में अदम्य शौर्य दिखाने का नतीजा,आईटीबीपी के 21 जवानों को मिला बहादुरी पदक

नई दिल्ली। कोविड-19 के प्रसार को रोकने और इसके चिकित्सीय प्रबंधन के लिए 318 आईटीबीपी और 40 अन्य सीएपीएफ कर्मियों के नाम भी केंद्रीय गृह मंत्री के विशेष ऑपरेशन मेडल के लिए चयनित हुए हैं। पूर्वी लद्दाख में मई और जून माह में चीनी फौज के साथ हुई झड़पों के दौरान साहस और शौर्य का परिचय देने वाले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के 21 जवानों की बहादुरी पदक से नवाजे जाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा 294 आईटीबीपी जवानों को बहादुरी के लिए आईटीबीपी डीजी का ‘गैलेंट्री प्रशंसा-पत्र’ मिला है। कोविड-19 के प्रसार को रोकने और इसके चिकित्सीय प्रबंधन के लिए 318 आईटीबीपी और 40 अन्य सीएपीएफ कर्मियों के नाम भी केंद्रीय गृह मंत्री के विशेष ऑपरेशन मेडल के लिए चयनित हुए हैं। बता दें कि आईटीबीपी ने उन 21 कर्मियों के नाम बहादुरी पदक के लिए अनुशंसित किए थे, जिन्होंने पिछले दिनों पूर्वी लदाख में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़पों के दौरान उनका बहादुरी से डटकर सामना किया था। आईटीबीपी जवानों ने शील्ड का प्रभावशाली उपयोग करते हुए बहुत पराक्रम के साथ वहां भारी संख्या में मौजूद पीएलए सैनिकों को आगे बढ़ने से रोके रखा। स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए आईटीबीपी ने बहुत आला दर्जे के युद्ध कौशल का परिचय दिया था। आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देसवाल ने 294 जवानों को ईस्टर्न लद्दाख में चीनी सैनिकों का शौर्य और बहादुरी के साथ सामना करने के लिए डीजी प्रशंसा पत्र और प्रतीक चिन्ह भी प्रदान किया है। बल के 6 अन्य जवानों को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के विरुद्ध सफल अभियानों के लिए डीजी प्रशंसा पत्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया है। इसके साथ ही आईटीबीपी ने अपने 318 कर्मियों और 40 अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों के नाम केंद्रीय गृहमंत्री स्पेशल ऑपरेशन ड्यूटी मेडल के लिए भेजे हैं। इन्होंने कोरोना के प्रसार को रोकने और अन्य प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आईटीबीपी जनवरी से ही कोरोना के विरुद्ध संघर्ष में बढ़ चढ़कर भाग लेती रही है।

सीआरपीएफ के इस जांबाज को मिला बहादुरी का 7वां पदक-ऑपरेशन के दौरान टीयर गैस और हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा आतंकियों के पास दूसरे बड़े हथियार भी थे। क्यूएटी ने जब एक के बाद एक टीयर गैस के दर्जनों गोले अंदर फेंके तो आतंकियों को सामने आना पड़ा। खास बात यह रही कि आतंकियों ने सीआरपीएफ की वर्दी पहन रखी थी। जब धुआं खत्म हुआ तो मालूम चला कि एक आतंकी हमारी टीम के साथ बैठा हुआ था। हमारे जवानों को उसकी ड्रेस और पाउच पर कुछ शक हुआ। इससे पहले कि उसे पकड़ पाते, दूसरी ओर से आरएल फायर हो गया। चारों तरफ धुआं फैल गया। आतंकियों ने फायरिंग भी शुरू कर दी थी। इसका फायदा उठाकर वह अपने साथियों से जा मिला। बाद में तीनों आतंकवादी मारे गए। उस मुठभेड़ में बीएसएफ का एक हवलदार घायल हो गया था। सीआरपीएफ क्यूएटी ने ही उसे सुरक्षित बाहर निकाला था। 15 अगस्त 2018 को नरेश कुमार को बहादुरी के दो पदक प्रदान किए गए। जनवरी 2019 और अगस्त 2019 में भी एक एक पदक मिला। नरेश कुमार को अर्बन टेरेरिज्म से निपटने में खासी महारत हासिल है।

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