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क्यों किया जाता है ईसीजी ?.जानिये डीएम, कार्डियोलॉजी डॉ अनुभव सिंघल से

मुजफ्फरनगर। दिल की सूक्ष्म कोशिकाओं से उठी तरंग एक करंट के सिग्नल की तरह पूरे दिल में फैल कर, दिल को धड़काती है, जिसे छाती, कलाई और टखनों में इलेक्ट्रोड्स लगाकर एक छोटे लैपटॉप नुमा मशीन (ईसीजी मशीन) द्वारा एक विशेष गुलाबी थर्मल पेपर (ईसीजी पेपर) पर रिकॉर्ड कर लिया जाता है। क्योंकि हृदय में तरंग के उठने एवं फैलने का एक निश्चित पैटर्न होता है इसलिए ईसीजी पेपर पर भी नॉर्मल दशा में एक सेट नॉरमल पैटर्न कुछ वेव्स के रूप में (जिन्हें पी, क्यू-आर-एस, टी वेव व एस-टी सैगमेन्ट नाम दिया गया है) प्रिंट हो जाता है।

ईसीजी से क्या पता चलता है

मरीज़ को अटैक तो नहीं चल रहा है, दिल फैला तो नहीं है, बीपी, धड़कन का अनियमित/तेज/कम होना, पुराने हार्ट-अटैक  की जानकारी हेतु ईसीजी किया जाता है। छाती में दर्द का कारण हार्ट-अटैक तो नहीं इसके लिए ईसीजी सबसे पहला किया जाने वाला टेस्ट होता है उसी के बाद मरीज को खून का थक्का घोलने वाले इंजेक्शन (स्ट्रैप्टोकाइनेज़/रिटिप्लेज़/टिनिक्टिप्लेस) या एंजियोग्राफी/स्टैंटिंग की सलाह दी जाती है। कभी-कभी ईसीजी में अटैक की स्थिति क्लियर ना होने पर खून के टेस्ट जैसे ट्रोपोनिन, सीके-एमबी भी किए जाते हैं।  अटैक के अलावा चक्कर/बेहोशी की वजह धडकन का कम होना(सीएचबी) तो नही-पेस मेकर लगाने का निर्णय ईसीजी के बेस पर ही लिया जाता है। धडकन बढने/घबराहट की वजह हार्ट है या टेंशन, यह भी धडकन के समय का ईसीजी निकाल कर पता लगाया जाता है।उसी अनुसार तार द्वारा आप्रेशन(ईपी-आरएफए) या दवा द्वारा इलाज का निर्णय लिया जाता है। कई बार दिल का फैलना, ईसीजी में एलबीबीबी नामक गड़बड़ी देखकर पता लगाया जाता है।  बहुत बार नॉरमल लोगों के ईसीजी में भी कुछ एब्नार्मेलिटी जैसे आरबीबीबी पड़ा रहता है। यह अलग से अपने आप मे कोई बिमारी नही है। कभी-कभी ईसीजी निकालने के दौरान, टेक्नीशियन द्वारा तार (लीड्स) गलत तरह से लगाने या कैलीबिरेशन बढाने से ईसीजी गड़बड़ आने लगता है एवं डाँ भी  कन्फ्यूज हो जाते हैं।

हॉल्टर किसे कहते हैं

बार-बार बेहोशी/चक्कर (सिंन्कोप) आने की दशा में 24 घंटे की ईसीजी रिकॉर्डिंग की जाती है। इसके लिए छाती पर इलेक्ट्रोड चिपकाकर एक छोटी पेजर टाइप की मशीन को मरीज की जेब मे 24 घंटे रखा जाता है। इस दौरान मरीज आराम से घूम फिर सकता है/रुटीन काम कर सकता है। 24 घंटे बाद इलेक्ट्रोड्स हटा दिया जाते हैं एवं पेजर नुमा डिवाइस मे लगी कैसेट निकाल कर कम्प्यूटर मे 24 घंटे की ईसीजी रिकोर्डिंग का एनालिसिस करते हैं कि कही इस दौरान धडकन कम तो नही हुई।

पुराने ईसीजी का क्या करें

मरीजों को अटैक/धडकन के एवं पुराने सारे ईसीजी, चाहे नोर्मल ही क्यों न हों, फोटो खींचकर, स्कैन करके या व्हाट्सएप पर सेव कर लेना चाहिए क्योंकि कुछ साल बाद ये ईसीजी फेड हो जाते हैं या पूरी तरह मिट भी जाते हैं।

डॉ अनुभव सिंघल

एमडी, मेडिसिन (गोल्डमेडल) डीएम,

कार्डियोलॉजी (एसजीपीजीआई लखनऊ)

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