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पांच महीने में ही उर्मिला मातोंडकर ने राजनीति से की तौबा, कांग्रेस से दिया इस्तीफा

मुंबई। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले फिल्मों से सियासत में आई उर्मिला मातोंडकर ने पांच महीने में ही राजनीति को अलविदा कह दिया। उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा ऐसे वक्त में हुआ है, जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं।

उर्मिला ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर उत्तर मुंबई सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें उनकी हार हुई। वह इस साल मार्च में कांग्रेस में शामिल हुई थीं। मातोंडकर के इस्तीफे के पीछे पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को कारण माना जा रहा है। उर्मिला ने चुनाव में हुई हार के बाद ही मुंबई इकाई के अध्यक्ष को एक गोपनीय पत्र लिख कर इसका जिक्र किया था और उन्हें हराने के लिए पार्टी के ही कुछ नेताओं को जिम्मेदार बताया था। लेकिन उनके पत्र पर संबंधितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे वे बेहद नाराज थीं। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एक तरफ पार्टी नेताओं को एकजुट करने की कोशिश में जुटी है तो दूसरी तरफ उर्मिला का इस्तीफा कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी वाली खबर बन कर सामने आई है।

मातोंडकर ने अपने बयान में कहा कि मुंबई कांग्रेस के मुख्य पदाधिकारी पार्टी को मजबूत बनाना चाहते नहीं हैं अथवा वे ऐसा करने में अक्षम हैं। उन्होंने कहा कि मैंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। मेरी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनाएं निहित स्वार्थों वाले व्यक्तियों को इस बात की इजाजत नहीं देती कि मुंबई कांग्रेस में किसी बड़े लक्ष्य पर काम करने के बजाय मेरा इस्तेमाल ऐसे माध्यम के रूप में किया जाए जिससे अंदरूनी गुटबाजी का सामना किया जा सके।

मातोंडकर ने कहा कि उनके मन में पहली बार इस्तीफा देने की बात तब आई जब मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा को 16 मई के लिखे पत्र में उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अपने पत्र में उन्होंने मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरूपम के करीबी सहयोगियों संदेश कोंदविल्कर और भूषण पाटिल के कृत्यों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि उक्त पत्र में विशेषाधिकार प्राप्त और गोपनीय बातें थीं, जिसे आसानी से मीडिया में लीक कर दिया गया, जो मेरे अनुसार घोर विश्वासघात था। उन्होंने कहा कि कहने की जरूरत नहीं है कि मेरे द्वारा लगातार विरोध के बावजूद पार्टी में किसी भी व्यक्ति ने माफी नहीं मांगी या मेरे प्रति कोई सरोकार नहीं दिखाया।

मातोंडकर ने दावा किया कि उत्तरी मुंबई में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के लिए कुछ जिम्मेदार लोगों के नाम उन्होंने अपने पत्र में लिखे, लेकिन उनकी जवाबदेही तय करने की जगह उन्हें नए पदों के रूप पुरस्कार दिया गया। उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि मुंबई कांग्रेस के मुख्य पदाधिकारी या तो अक्षम हैं अथवा बदलाव लाने और पार्टी की भलाई संगठन में परिवर्तन लाने के लिए संकल्पबद्ध नहीं हैं। मातोंडकर के बयान में उनके अगले राजनीतिक कदम के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। बहरहाल, उन्होंने कहा कि वह विचारों एवं विचारधाराओं के पक्ष में खड़ी हुई हैं तथा वह लोगों के लिए ईमानदारी एवं गरिमा के साथ काम करती रहेंगी।

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