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सीमा पर तैनात बीएसएफ के 5000 जवान बने योगाचार्य

नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा की रक्षा के लिए तैनात ‘सीमा सुरक्षा बल’ (बीएसएफ) के ढाई लाख अधिकारियों और जवानों का स्वास्थ्य बेहतर बनाने की खातिर उन्हें योग में पारंगत बना दिया गया है। खास बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर बीएसएफ ने अपने सभी कर्मियों को योग सिखाने के लिए बॉर्डर की सख्त ड्यूटी देने वाले पांच हजार जवानों को योगाचार्य बनाया है। योगाचार्य बनने के बाद ये शिक्षक केवल योग ही नहीं सिखाते, बल्कि बॉर्डर पर ड्यूटी भी देते हैं। इसी वजह से सीमा सुरक्षा बल में योग को एक अभ्यास के रूप में स्वीकृति मिली है। योग की मदद से जवानों की मानसिक और शारीरिक फिटनेस को दुरुस्त रखा जा रहा है। बीएसएफ की प्रत्येक इकाई में योग प्रशिक्षक की तैनाती सुनिश्चित की गई है। नतीजा, बल की योग टीम ने अखिल भारतीय पुलिस योग चैंपियनशिप पर दो बार कब्जा जमाया है।

रविवार को बल की विभिन्न स्थापनाओं के अंतर्गत तैनात जवानों व उनके परिजनों ने छठे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में उत्साहपूर्वक भाग लिया। 21 जून 2015 को जब पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आयोजित किया गया, तो बीएसएफ के पास योगाचार्य नहीं थे। बीएसएफ ने दूसरे संगठनों की मदद से अपने जवानों को योग का प्रशिक्षण दिलाया। चूंकि लक्ष्य हर यूनिट में योग को पहुंचाना था, इसलिए दो तीन वर्षों तक लगातार योगाचार्य तैयार किए गए। योगाचार्य बनने वालों को बॉर्डर ड्यूटी से कोई छूट नहीं मिलती थी। वे अपनी ड्यूटी भी देते थे और जवानों को सुबह शाम योग सिखाते रहे। कई जगहों पर विशेष योग शिविर भी आयोजित किए गए। बाहर से आए विशेषज्ञों ने बीएसएफ के योगाचार्यों को कई बारीकियां समझाई। उन्हें यह बताया गया कि कौन सी योग क्रिया शरीर के किस हिस्से पर क्या असर डालती है। मौजूदा समय में बीएसएफ के पास खुद के पांच हजार से अधिक कुशल योगाचार्य तैयार हैं। इन्होंने बल के सभी जवानों को योग में पारंगत बना दिया है। बीएसएफ के अनुसार योग के माध्यम से जवान दूसरे लोगों को शारीरिक स्वच्छता व तनावमुक्त जीवन जीने का संदेश दे रहे हैं। हालांकि कोविड-19 महामारी ने हमारी गतिशीलता को कम कर दिया है, परंतु यह कभी भी हमारी भावनाओं और उत्साह को कम नहीं कर सकती।

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